*बिहार मोतीहारी से अमरजीत सिंह*
युवा संवाद में छात्राओं के सवालों पर घिरे भाजपा के पूर्व प्रवक्ता, जवाब देने में छूटे पसीने
सीकरीया शिक्षण संस्थान में भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत हुआ युवा संवाद कार्यक्रम, श्वेता कुमारी के सवालों का जवाब नहीं दे पाए अखिलेश कुमार सिंह, कई अन्य विद्यार्थियों के सवाल भी रहे अनुत्तरित
मोतिहारी। भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत मोतिहारी स्थित सीकरीया शिक्षण संस्थान में युवा संवाद एवं प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन भाजपा नेता एवं उद्योगपति यमुना सीकरीया की ओर से किया गया। कार्यक्रम में पूर्व भाजपा प्रवक्ता, बिहार अखिलेश कुमार सिंह मुख्य रूप से शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ अखिलेश कुमार सिंह, भाजपा नेता यमुना सीकरीया, पूर्व प्राचार्य अरुण कुमार मिश्रा, संस्थान की प्रिंसिपल प्रीति दुबे एवं अनिल प्रसाद ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। वहीं, संस्थान की ओर से पहुंचे अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत युवा संवाद और विद्यार्थियों के साथ सवाल-जवाब के उद्देश्य से हुई। लेकिन जैसे ही विद्यार्थियों ने अपनी जिज्ञासाएं रखनी शुरू कीं, कार्यक्रम का माहौल बदलने लगा। छात्रा श्वेता कुमारी ने अखिलेश कुमार सिंह से कुछ सवाल पूछे, जिनका वे स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। इसके बाद अन्य विद्यार्थियों ने भी एक के बाद एक सवालों की झड़ी लगा दी।
विद्यार्थियों के सवालों के बीच भाजपा के पूर्व प्रवक्ता अखिलेश कुमार सिंह कई बार असहज नजर आए। आरोप है कि बच्चों के सीधे सवालों का स्पष्ट जवाब देने के बजाय वे इधर-उधर की बातें करने लगे और चर्चा को धर्म जैसे दूसरे विषयों की ओर मोड़ दिया। इस दौरान कई विद्यार्थियों के सवालों का जवाब भी नहीं मिल पाया।
जैसे-जैसे सवालों का सिलसिला आगे बढ़ा, अखिलेश कुमार सिंह के सामने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का जवाब देना चुनौती बनता गया। उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई देने लगीं। जिस कार्यक्रम का मकसद युवाओं के साथ संवाद स्थापित करना था, वहां विद्यार्थियों के सवालों ने राजनीतिक संवाद की असली परीक्षा ले ली।
इस कार्यक्रम में सबसे खास बात यह रही कि विद्यार्थियों ने केवल अतिथियों की बातें सुनने के बजाय अपनी समझ और सवालों के जरिए संवाद में सक्रिय भागीदारी निभाई। श्वेता कुमारी के सवालों से शुरू हुआ यह सवाल-जवाब का सिलसिला कार्यक्रम की चर्चा का केंद्र बन गया।
युवा संवाद के इस आयोजन ने यह संदेश जरूर दिया कि आज के युवा केवल राजनीतिक भाषण सुनना नहीं चाहते, बल्कि लोकतंत्र, व्यवस्था और समाज से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछकर उनका स्पष्ट जवाब भी चाहते हैं।
रिपोर्ट;अमरजीत सिंह
