ब्यूरो चीफ सुंदरलाल जिला सोलन,
पीएम केंद्रीय विद्यालय 14 जीटीसी सुबाथू में सात दिवसीय “भारतीय भाषा संगम” कार्यक्रम के अंतर्गत प्रथम दिवस का आयोजन अत्यंत उत्साहपूर्वक किया गया। यह कार्यक्रम केंद्रीय विद्यालय संगठन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्राचार्या आशा चौधरी द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में आशा चौधरी ने छात्रों को भारतीय भाषाओं की विविधता, महत्व एवं राष्ट्रीय एकता में उनकी भूमिका के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि “भारत की भाषाई समृद्धि हमारी सांस्कृतिक पहचान की रीढ़ है और प्रत्येक विद्यार्थी को इसमें योगदान देना चाहिए।” उन्होंने भाषा को आत्म-अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बताया और छात्रों से आग्रह किया कि वे विभिन्न भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान एवं रुचि विकसित करें।
कार्यक्रम के विशेष सत्र में डॉ. पंकज कपूर, पीजीटी हिंदी ने विद्यार्थियों को भारतीय भाषाओं की वैज्ञानिक संरचना, वर्णमाला की उत्पत्ति, और शुद्ध उच्चारण की आवश्यकता पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि सही उच्चारण केवल भाषा की सुंदरता को बढ़ाता ही नहीं बल्कि उसके मूल अर्थ को भी सुरक्षित रखता है। डॉ. कपूर ने कक्षा में इंटरैक्टिव गतिविधियों के माध्यम से छात्रों को स्वरों, व्यंजनों और उनके उच्चारण स्थानों की जानकारी दी तथा उदाहरणों के साथ उनका अभ्यास कराया। उन्होंने भाषा की ध्वन्यात्मक विशेषताओं को रेखांकित करते हुए यह भी बताया कि भाषा सीखना केवल एक औपचारिक अभ्यास नहीं, बल्कि संस्कृति से जुड़ने का सशक्त माध्यम है।
इसके उपरांत, डॉ. प्रदीप शर्मा डोबरियाल, टीजीटी संस्कृत ने संस्कृत भाषा की सरलता, वैज्ञानिकता और उसकी व्यावहारिक उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि आज के युग में भी इसके व्याकरणिक नियम अत्यंत संगठित और तार्किक हैं। डॉ. डोबरियाल ने छात्रों को दैनिक जीवन में प्रयुक्त होने वाले संस्कृत वाक्यों, शुभकामनाओं, अभिवादन एवं संवाद की श्रृंखला का अभ्यास कराया। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे संस्कृत को बोली की भाषा के रूप में अपनाएं और उसका प्रयोग विद्यालय एवं घर में करें।
कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षकों एवं छात्रों ने अत्यंत उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह आयोजन न केवल भाषाई विविधता को जानने का अवसर बना, बल्कि भारत की एकता में विविधता की भावना को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।