मुरैना 20 जून 2025/बरसात जहां भीषण गर्मी से लोगों को राहत पहुंचाती है, वहीं सापों का कहर भी इस मौसम में बढ़ जाता है। बारिश के साथ ही शहर व ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश (सांप काटने) की घटनाएं बढ़ने लगती हैं। बरसात का पानी सांप के बिलों में भर जाता है तो वे बाहर आकर सुरक्षित स्थान खोजते हैं, ऐसे में कई बार सांप लोगों के घरों में घुसकर पनाह पाते हैं, जिससे सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। 2020 के एक अध्ययन के अनुसार भारत में प्रति वर्ष औसतन लगभग 58 हजार लोगों की मौत सांप के काटने से होती है। बारिश के मौसम में बिलों से बाहर निकलने के बाद वो ज्यादातर खेतों में काम करने वाले लोगों को अपना शिकार बनाते हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पद्मेश उपाध्याय ने बताया कि जंगली और ऊँची घास वाले क्षेत्रों में जाने से बचने का प्रयास करें, क्योंकि सांप ऐसे स्थानों पर आसानी से छिप सकते हैं। बरसात के दिनों में घर के अंदर रहें और बाहर जाने से बचें, क्योंकि सांप इस समय अधिक गमिशील होते हैं। लंबे बूट पहनें, ताकि सांप आपके पैरों पर न काट सकें।
*सर्पदंश के दौरान क्या करें, क्या न करें तथा बचाव हेतु सुझाव*
*क्या करें*
सबसे पहले जिस व्यक्ति को सांप ने काटा है, उस व्यक्ति की घबराहट को दूर करें, क्योंकि उसे जितनी घबराहट होगी, उतनी तेजी से उसके शरीर में जहर फैलता जायेगा। पीड़ित व्यक्ति को सोने न दें एवं किसी भी प्रकार की शारीरिक क्रिया न करने दें। एम्बुलेंस 108 पर कॉल करें। सर्पदंश से पीड़ित पुरुष या महिला के हाथ, पैरों से घड़ी, कड़ा, चूड़ी, बिछिया, कलावा या अंगूठी को निकाल दें। उसके कपड़े भी थोड़े डीले कर दें। मरीज के हाथ या पैर में दंश से उचित दूरी पर एक हल्का कपड़ा या पट्टी (साड़ी की प्लेट की तरह से) बांध सकते है। जिससे जहर तेजी से न फैले और हृदय की ओर न बढ़े। मरीज के घाव से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करें। घाव को साबुन एवं साफ पानी से धोएं। मरीज को एंबुलेंस या किसी स्टैचर तक उठाकर ही ले जाएं, क्योंकि चलने-फिरने से लिम्फ नोड क्रियाशील होते है जिससे जहर तेजी से शरीर में फैलता है। पीड़ित व्यक्ति को नजदीक के चिकित्सालय ले जाएं, जहां पर डॉक्टर एवं एंटीवेनम उपलब्ध हो।
*क्या न करें*
सांप के जहर को कभी भी चूसकर निकालने की कोशिश न करें। अपने मन से किसी भी प्रकार की दवाई मरीज को न दें। पीड़ित व्यक्ति के सर्पदंश वाले भाग पर किसी भी प्रकार का मलहम न लगाएं। सपेरे अथवा तांत्रिक के चक्कर में न पड़े। सांप को अकेला छोड़ दें, कई बार सांप के नजदीक आने के कारण लोग सर्पदंश का शिकार बन जाते है। अपने हाथ व पैर को उन स्थानों यथा संभव दूर रखें, जहाँ पर आपकी दृष्टि न पड़ती हो। जब तक आप सांप की आक्रमण परिधि से सुरक्षित दूरी पर न हों। पत्थर व लकड़ो से मारने का प्रयास न करें। यदि मजबूत चमड़े के जूते न पहने हों तो ऊँची घास वाले स्थानों से दूर रहें, जहां तक संभव हो स्वयं को पगडण्डियों तक सीमित रखें। अंगों के चारों ओर टाइट बैंड न बांधे।
*ध्यान रखने योग्य बातें*
आस-पास का इलाका साफ सुथरा रखिए और कोई कबाड़ या ढेर को न पनपने दें। साथ ही साथ चूहों की आबादी को न बढ़ने दें। समुदाय में उचित माध्यम से सर्पदंश से बचाव के लिए बचाव संबंधी जागरूकता का प्रचार-प्रसार करें। सर्पदंश में तुरंत अस्पताल नहीं ले जा सकते तो ये प्राथमिक उपचार करें। सबसे पहले पीड़ित व्यक्ति को यह भरोसा दिलाएं कि 80-90 प्रतिशत सांप जहरीले नहीं होते हैं। शरीर के प्रभावित हिस्से से अंगूठियां, घड़ी, जूते व तंग कपड़े, आभूषण आदि को हटा दें, ताकि प्रभावित हिस्से में रक्त का संचरण न रुके। सर्पदंश प्रभावित अंग को स्थिर कर दें एवं इसे हिलने-डुलने से बचाएं। पीड़ित व्यक्ति को जितनी जल्दी हो सके, निकटतम स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं। सांप के रंग और आकार को देखने एवं याद रखने की कोशिश करें। घाव को साफ पानी और साबुन से साफ करें।
*अति महत्वपूर्ण*
सर्पदंश के बाद निम्नलिखित गतिविधियाँ नहीं करनी चाहिए। जिनमें सर्प को ढूँढ़ना, पकड़ना या मारना नहीं चाहिए। सर्पदंश की जगह ब्लेड़, चाकू या किसी तीक्ष्ण धारदार हथियार से चीरा नहीं लगाना चाहिए। मुंह द्वारा विष को चूसकर नहीं निकालना चाहिए। सपेरे की तांत्रिक या अनाधिकृत औषधि देने में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। पीड़ित को डॉक्टर के पास तुरंत ले जाना चाहिये। सर्पदंश के लक्षण दिखने का इंतजार नहीं करना चाहिए। सर्पदंश की जगह बर्फ की सिल्ली, या गर्म, ठण्ड़ा कपड़ा बाँधना चाहिए। सर्पदंश की जगह रस्सी या कपड़ा कसकर बाँधना नहीं चाहिए। डॉक्टर के परामर्श के बिना पीड़ित व्यक्ति को किसी भी प्रकार की दवाई नहीं देना चाहिए। सर्पदंश के बाद पीड़ित को चलना, दौड़ना या वाहन नहीं चलाने देना चाहिए। किसी दोपहिया वाहन द्वारा पीड़ित को अस्पताल ले जाने का सही तरीका दोपहिया वाहन द्वारा पीड़ित कोअस्पताल ले जाते समय दो लोगों के मध्य में बिठाना चाहिये। पीड़ित न गिरे इसलिए पीछे बैठे आदमी द्वारा उसे भली भांति कसकर पकड़ कर रखना चाहिये। पीड़ित के पैर दोपहिया वाहन के पायदान (फुटरेस्ट) पर रखने चाहिये। पीड़ित व्यक्ति को नजदीक के चिकित्सालय ले जाएं, जहां पर डॉक्टर एवं एंटीवेनम उपलब्ध हो।
रिपोर्ट गजेन्द्र सिंह यादवअस्पताल ले जाते समय दो लोगों के मध्य में बिठाना चाहिये। पीड़ित न गिरे इसलिए पीछे बैठे आदमी द्वारा उसे भली भांति कसकर पकड़ कर रखना चाहिये। पीड़ित के पैर दोपहिया वाहन के पायदान (फुटरेस्ट) पर रखने चाहिये। पीड़ित व्यक्ति को नजदीक के चिकित्सालय ले जाएं, जहां पर डॉक्टर एवं एंटीवेनम उपलब्ध हो।
रिपोर्ट गजेन्द्र सिंह यादव