गजराराजा मेडिकल कॉलेज में विश्व सिकल सेल पर हुआ जागरूकता कार्यक्रम
ग्वालियर, 28 जून। ग्वालियर। गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के पैथोलॉजी विभाग द्वारा शनिवार को विश्व सिकल सेल पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अकादमिक ब्लॉक स्थित स्मार्ट क्लास में दोपहर 12 बजे से दोपहर 2 बजे तक आयोजित हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. आर.के.एस. धाकड़ थे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में जयारोग्य चिकित्सालय समूह अधीक्षक डॉ. सुधीर सक्सेना उपस्थित रहे। डॉ. धाकड़ ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि सिकल सेल एनीमिया एक गंभीर रक्त विकार है, जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं अर्धचंद्राकार (सिकल शेप) हो जाती हैं, जिससे शरीर के विभिन्न अंगों में रक्त प्रवाह बाधित होता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि विवाह पूर्व सिकल सेल की जांच अवश्य करवाएं, ताकि अगली पीढ़ी को इस रोग से बचाया जा सके। कार्यक्रम में पैथलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ.सुधा आयंगर भी विशेष रुप से मौजूद थीं।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. डॉ.यशोधरा गौर के व्याख्यान से हुई, जिन्होंने एक स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में सिकल सेल एनीमिया के महिलाओं, विशेषकर गर्भवती महिलाओं पर प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह बीमारी गर्भस्थ शिशु को भी प्रभावित कर सकती है, इसलिए विवाह पूर्व और गर्भावस्था के दौरान स्क्रीनिंग अत्यंत आवश्यक है। इसके बाद प्रो. डॉ. अजय गौर ने बताया कि यह रोग अधिकतर बचपन में ही सामने आता है और समय रहते निदान होने पर इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। डॉ. गजेन्द्र पाल सिंह ने नई-नई जांच विधियों की जानकारी दी, जो सटीक निदान में सहायक हैं। इसके बाद डॉ. अमित निरंजन ने स्क्रीनिंग प्रक्रियाएं पर बोलते हुए कहा कि समुदाय स्तर पर स्क्रीनिंग कार्यक्रमों को बढ़ावा देकर इस बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है। अंत में डॉ. अनिता आर्य ने काउंसलिंग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि रोगियों और उनके परिवारजनों को सही मार्गदर्शन देना, मानसिक रूप से सशक्त करना और उन्हें उपचार प्रक्रिया से जोड़ना बहुत आवश्यक होता है। कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं, फैकल्टी मेंबर्स, रेजिडेंट डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे और विशेषज्ञों से उनके उत्तर प्राप्त किए।
रिपोर्ट गजेन्द्र सिंह यादव