नरेश सोनी
इंडियन टीवी न्यूज
ब्यूरो हजारीबाग।
10 से 15 सालों से है राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय बसरिया सरकारी शिक्षक के मोहताज।
पारा टीचर समझ रहे हैं गांव के बच्चों को घर के मुर्गी दाल बराबर।
हजारीबाग /दारू : दारू प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत आने वाला राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय बसरिया बीते 10 से 15 वर्षों से वीरान पड़ा है। स्कूल में न तो प्रधानाचार्य हैं और न ही कोई सरकारी शिक्षक हैं। परिणामस्वरूप अभिभावकों को मजबूरन अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में भेजना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार बच्चों की फीस, बस भाड़ा और अन्य खर्चों के कारण उनकी आर्थिक स्थिति पर बोझ बढ़ गया है। बच्चों का खेलना-कूदना और उनकी सामान्य खुशी तक छिन गई है। स्कूल में कार्यरत पारा शिक्षक मात्र औपचारिकता निभा रहे हैं — ऐसे में “घर की मुर्गी दाल बराबर” की कहावत यहां सटीक बैठती है।
करीब 2500 की जनसंख्या वाले इस क्षेत्र का एकमात्र सरकारी विद्यालय अब बंद होने के कगार पर है। इससे ग्रामीणों में भारी निराशा है।
स्थानीय नागरिकों ने झारखंड के माननीय मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मांग की है कि बसरिया स्कूल में शीघ्र प्रधानाचार्य एवं सहायक शिक्षक की नियुक्ति की जाए, ताकि क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो सके। साथ ही उन्होंने उपायुक्त हजारीबाग, जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं सहायक शिक्षा पदाधिकारी से भी इस विषय पर संज्ञान लेने की अपील की है।