✍ किशोर कुमार दुर्ग छत्तीसगढ़ ब्यूरो चीफ इंडियन टीवी न्यूज नेशनल
राजनांदगांव में कथावाचक प्रदीप मिश्रा से संबंधित विशेष जानकारी, जैसा कि बताया गया है
राजनांदगांव में कथावाचक प्रदीप मिश्रा से संबंधित विशेष जानकारी, जैसा कि बताया गया है, वह एक विवादित घटना के बारे में है।
यहाँ उस घटना और प्रदीप मिश्रा जी के बारे में कुछ जानकारी दी गई है:
राजनांदगांव में विवादित घटना (समाचार रिपोर्ट के अनुसार)
कार्यक्रम: राजनांदगांव में एक शिव महापुराण कथा कार्यक्रम का आयोजन प्रस्तावित था।
रद्द करने का कारण: समाचार रिपोर्ट के अनुसार, कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने कथित तौर पर इस कथा को इसलिए रद्द कर दिया क्योंकि उन्हें तय की गई 31 लाख रुपये की ‘सेवा राशि’ (फीस) का भुगतान नहीं किया गया था।
समाचार पत्र का दृष्टिकोण: “भास्कर दूत” नामक समाचार पत्र ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उसने सवाल उठाया था कि भगवान शिव को केवल एक लोटा जल अर्पित करने की सादगी के मुकाबले कथावाचक द्वारा लाखों रुपये की फीस मांगना क्या उचित है। खबर ने इसे आस्था का व्यवसायीकरण करार दिया था और प्रदीप मिश्रा के “मुझे कुछ नहीं चाहिए” जैसे बयानों और फीस की मांग के बीच विरोधाभास पर जोर दिया था।
कथावाचक प्रदीप मिश्रा के बारे में सामान्य जानकारी:
मूल स्थान: पंडित प्रदीप मिश्रा मूल रूप से मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से हैं।
प्रमुखता:वे अपनी शिव महापुराण कथा के लिए बहुत प्रसिद्ध हैं। उनकी कथाओं में शिव महिमा, रुद्राक्ष के महत्व और विभिन्न घरेलू उपायों (जिन्हें वे “कुबेरेश्वर धाम के उपाय” या “सीहोर वाले बाबा के उपाय” कहते हैं) पर विशेष जोर होता है।
लोकप्रियता: उनकी कथाओं में लाखों की संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। उनके प्रवचन टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं।
सीहोर वाले बाबा’: वे ‘सीहोर वाले बाबा’ के नाम से भी जाने जाते हैं, क्योंकि उनका आश्रम और मुख्य कार्यक्षेत्र सीहोर में ही स्थित कुबेरेश्वर धाम में है।
विवाद: राजनांदगांव जैसी घटनाएं, जहाँ कथावाचकों द्वारा बड़ी फीस लेने का आरोप लगता है, समय-समय पर सामने आती रहती हैं। यह आस्था और व्यावसायिकता के बीच के संबंध पर बहस छेड़ती है।
संक्षेप में, राजनांदगांव के संदर्भ में प्रदीप मिश्रा की विशेष जानकारी उस घटना से जुड़ी है जहाँ फीस के भुगतान को लेकर कथा रद्द करने का आरोप लगा था, जिसने सार्वजनिक बहस को जन्म दिया।
मुख्य खबर का शीर्षक है: “शिव को एक लोटा जल और कथा वाचक को 31 लाख?”
यह खबर राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) में प्रस्तावित शिव महापुराण कथा कार्यक्रम से संबंधित एक विवाद के बारे में है। खबर के अनुसार:
कथावाचक प्रदीप मिश्रा द्वारा कथा रद्द कर दी गई है।
कथा रद्द करने का कारण बताया गया है कि उन्हें 31 लाख रुपये की सेवा राशि (फीस) नहीं मिली थी।
समाचार पत्र इस बात पर सवाल उठा रहा है कि जब भगवान शिव को केवल एक लोटा जल चढ़ाने से प्रसन्न किया जा सकता है, तो कथावाचक को 31 लाख रुपये की भारी भरकम फीस मांगना क्या आस्था का अपमान नहीं है।
इसमें कहा गया है कि आम भक्त के लिए शिव को एक लोटा जल ही चढ़ाना बड़ी बात होती है।
खबर इस बात पर भी जोर देती है कि प्रदीप मिश्रा जैसे कथावाचक जो मंच से कहते हैं कि उन्हें कुछ नहीं चाहिए, वे लाखों रुपये की डील करते हैं।
यह सवाल उठाया गया है कि क्या यह भक्ति है या कारोबार, खासकर ऐसे समय में जब देश में लोग गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई से जूझ रहे हैं।
खबर सच्चे संतों जैसे प्रेम महाराज का उदाहरण देती है जो बिना शुल्क के कथा करते हैं।
अंत में भक्तों से फैसला करने को कहा गया है कि उन्हें शिव चाहिए या शिव जी के नाम पर ‘रेट’ तय करने वाले कथावाचक।
यह खबर धार्मिक आयोजनों में कथावाचकों द्वारा ली जाने वाली फीस और आस्था व व्यवसाय के बीच के संबंध पर एक बहस छेड़ रही है।
अगर आप इस खबर या इसके किसी पहलू के बारे में और कुछ जानना चाहते हैं, तो कृपया पूछें।