कसया नगर में संचालित वृद्धाश्रम में अपने घरों से निकाली गईं आठ वृद्ध महिलाओं ने उन्हीं बेटों के लिए जीवित्पुत्रिका व्रत रखा, जिन बेटे व बहुओं ने उन्हें अपने घरों से बाहर निकाल दिया।
व्रती महिलाओं का कहना है कि बेटे-बहुओं ने ठुकराया है, हम तो एक मां है और एक मां की जब तक सांस चलती रहेगी, तब तक अपने बेटों के स्वस्थ्य, स्वास्थ्य, धन धान्य के लिए पूजा व्रत करती रहेंगी।
समाज कल्याण के सहयोग से वृद्धजन आवास गृह कसया में कुल 69 वृद्ध रहते हैं। जिनमें 28 पुरुष और 41 महिलाएं शामिल हैं। इन्हीं 41 वृद्ध महिलाओं में 8 महिलाओं ने अपने बेटों के लिए निर्जला व्रत रखा। इन महिलाओं ने अपने दुखों को छुपाते हुए बताया कि बेटे बहुओं को दोष नहीं दे सकते, दोष तो हमारे कर्मों का है। शायद हम लोगों की जिंदगी में यही लिखा था और लिखे को कौन टाल सकता है। बेटे बहुओं के द्वारा घर से निकालने के बावजूद भी इन 8 महिलाओं के नम आंखों से भी अपने बेटे बहुओं के लिए दुआएं ही निकल रही थीं। बेटे, बहुओं को कोसने के बजाय अपनी ही तकदीर को कोसते हुए पूरे श्रद्धा मन से निर्जला व्रत रखकर विधि विधान से पूजा पाठ में जुड़ी रहीं। प्रबंधक रागिनी सिंह रज्जू, लेखाकार ऋषभ कपूर, केयरटेकर मनोज पांडेय, रुचि मल्होत्रा, केयरटेकर रमा प्रजापति ने व्रती महिलाओं के विधि विधान पूजा पाठ के लिए सारी तैयारियां की थी। इस संबंध में वृद्धाश्रम की प्रबंधक रागनी सिंह रज्जू ने बताया कि आश्रम में 8 महिलाओं ने व्रत रखा है। जिनका पूरा इंतजाम किया गया हैं। व्रत रह कर अपने पुत्रों की सलामती की दुआ मांगी है। India TV itn Rajesh Maurya