India TV Rajesh Maurya सेवरही ब्लॉक के ग्राम सभा बांकखास में दुकानों के किराये की वसूली और सरकारी धन के दुरुपयोग को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच में पुष्टि हुई है। आरोप है कि ग्राम प्रधान ने ग्राम सभा की दुकानों का किराया वसूल कर खुद उसका उपयोग किया और अभिलेखों में सही प्रविष्टि नहीं की। इस मामले में डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने डीपीआरओ के नेतृत्व में एक कमेटी बनाकर जांच के आदेश दिए। कमेटी द्वारा किये गये जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं उजागर हुईं हैं। टीम ने इस मामले में ग्राम प्रधान और संबंधित तत्कालीन सचिव से धनराशि की वसूली और पंचायत राज अधिनियम के तहत कार्रवाई की संस्तुति की है।
सेवरही ब्लॉक के ग्राम सभा बांकखास निवासी गोविन्द यादव द्वारा डीएम को शिकायती पत्र देकर ग्राम प्रधान गायत्री देवी पर ग्राम सभा में राजस्व का नुकसान करने को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए जांच कर कार्रवाई की मांग की गई थी। डीएम ने इसे गंभीरता से लिया और डीपीआरओ लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए जांच कर कार्रवाई की मांग की गई थी। डीएम ने इसे गंभीरता से लिया और डीपीआरओ आलोक कुमार प्रियदर्शी के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित कर बिंदुवार जांच का आदेश दिया। जांच टीम ने विभिन्न बिन्दुओं की जांच कर डीएम को रिपोर्टसौंप दी है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, ग्राम पंचायत बांकखास में अलग-अलग कार्यकाल में कुल 43 दुकानों का निर्माणबंजर भूमि पर कराया गया था। इन दुकानों का आवंटन वर्ष-2009 में ग्राम पंचायत की बैठक के माध्यम से किया गया। इसका किराया शुरुआत में 100 रुपये प्रतिमाह से शुरू हुआ, जो अब बढ़कर 600 रुपये प्रति दुकान प्रतिमाह लिया जा
रहा है। जांच में पाया गया कि जून 2021 से जुलाई 2025 तक दुकानों से करीब 12.64 लाख रुपये का किराया वसूल किया जाना चाहिए था, जबकि ग्राम निधि और ओएसआर खाते में मात्र तीन लाख रुपये जमा दिखाए गए थे यानी करीब 9.64 लाख रुपये का हिसाब नहीं मिला। कई दुकानदारों ने बताया कि, वे किराया नगद प्रधान के प्रतिनिधि को देते रहे, लेकिन वे इसकी रसीद नहीं दे रहे थे। अधिकारियों ने पाया कि किराया वसूली का कोई रजिस्टर उपलब्ध नहीं है और न ही किराया बढ़ाने का कोई प्रस्ताव रखा गया है। यहां तक कि, किराया वसूली, प्रविष्टि और बैंक में जमा की प्रक्रिया का पालन ही नहीं हुआ।आलोक कुमार प्रियदर्शी के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित कर बिंदुवार जांच का आदेश दिया। जांच टीम ने विभिन्न बिन्दुओं की जांच कर डीएम को रिपोर्टसौंप दी है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, ग्राम पंचायत बांकखास में अलग-अलग कार्यकाल में कुल 43 दुकानों का निर्माणबंजर भूमि पर कराया गया था। इन दुकानों का आवंटन वर्ष-2009 में ग्राम पंचायत की बैठक के माध्यम से किया गया। इसका किराया शुरुआत में 100 रुपये प्रतिमाह से शुरू हुआ, जो अब बढ़कर 600 रुपये प्रति दुकान प्रतिमाह लिया जारहा है।
जांच में पाया गया कि जून 2021 से जुलाई 2025 तक दुकानों से करीब 12.64 लाख रुपये का किराया वसूल किया जाना चाहिए था, जबकि ग्राम निधि और ओएसआर खाते में मात्र तीन लाख रुपये जमा दिखाए गए थे यानी करीब 9.64 लाख रुपये का हिसाब नहीं मिला। कई दुकानदारों ने बताया कि, वे किराया नगद प्रधान के प्रतिनिधि को देते रहे, लेकिन वे इसकी रसीद नहीं दे रहे थे। अधिकारियों ने पाया कि किराया वसूली का कोई रजिस्टर उपलब्ध नहीं है और न ही किराया बढ़ाने का कोई प्रस्ताव रखा गया है। यहां तक कि, किराया वसूली, प्रविष्टि और बैंक में जमा की प्रक्रिया का पालन ही नहीं हुआ।