इंडिया टीवी राजेश मौर्य
महीने बदले साल बदला लेकिन नहीं बदली तस्वीर, स्वास्थ्य मंत्री का फरमान भी बेअसर
हाटा सीएचसी बना कमीशनखोरी का गढ़, सरकारी दवाओं पर ‘बाहरी दुकानों’ का कब्ज़ा!
गरीब मरीजों की जेब पर डाका, डॉक्टर–मेडिकल–लैब गठजोड़ से चल रही है लूट की खुली दुकान
कुशीनगर जिले के हाटा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों की जेब काटने का खेल खुलेआम चल रहा है। अस्पताल के कुछ डॉक्टरों ने बाहर की मेडिकल दुकानों और जांच केंद्रों से कमीशन तय कर रखा है। सरकारी स्टॉक में दवाएं होने के बावजूद मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट कराने को मजबूर किया जा रहा है।
योगी सरकार के दावे हैं कि सरकारी अस्पतालों में दवाएं और आधुनिक जांच सुविधाएं पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं। लेकिन हकीकत यह है कि डॉक्टर खुद उन्हीं दवाओं को नकार रहे हैं और निजी दुकानों की पर्ची थमा रहे हैं।
अस्पताल परिसर में मौजूद कुछ मेडिकल स्टोर और लैब संचालक डॉक्टरों के चेंबर तक सीधी पहुंच रखते हैं। यही लोग पर्ची उठाकर मरीजों को बाहर की दवाएं दिलाने का दबाव बनाते हैं। नतीजा — गरीब तबके के मरीज सरकारी सुविधा से वंचित होकर लूट का शिकार बन रहे हैं।
अस्पताल के अंदर डॉक्टरों, मेडिकल स्टोर वालों और लैब संचालकों की मिलीभगत से कमीशनखोरी का पूरा तंत्र खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से तत्काल जांच की मांग की है और दोषी डॉक्टरों पर कार्रवाई की गुहार लगाई है।
सवाल उठता है — जब सरकारी दवाएं और जांच की सुविधा मौजूद हैं, तो मरीजों को बाहर क्यों भेजा जा रहा है? आखिर इस लूट का असली जिम्मेदार कौन है?
कल के अंक में कैसे खुले आम डॉक्टर ही मरीजों को उनकी कम्पनी वाली दवा न लेने पर मरीजों को करते है प्रताड़ित उसकी तस्वीर बताई जाए
गी