यू ही नही हुई नशे की तस्करी में लिप्त करोड़ो की सम्पत्ति अर्जित कर चुके श्रीराम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विभोर राणा के साथ अन्य सहयोगियों की, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जीरो टारलेंस नीति के चलते एसटीएफ को नशे के खात्मे को दिए गए टास्क के तहत हुई कार्यवाही: सूत्र
घर को आग लगी घर के चिराग से, फ़र्ज़ी फर्मो के सहारे नशे की दवाई की तस्करी में लिय अभिषेक शर्मा दरअसल विभोर राणा का पारिवारिक सदस्य बताया गया, 4 नवम्बर को गाज़ियाबाद में हुई एफआईआर में 17 नामजद में एक नाम अभिषेक शर्मा का भी है।
उपमहानिरीक्षक सहारनपुर परिक्षेत्र अभिषेक सिंह व एसएसपी सहारनपुर आशीष तिवारी का कड़ा संदेश की नशे में लिप्त कोई भी शख्स बख्शा नही जाएगा।
सहारनपुर: दरअसल प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ द्वारा नशे के सौदागरो पर नकेल कसने के लिए ही एसटीएफ को प्रभावी कार्यवाही करने के आदेश दिए गए जिसके तहत एसटीएफ ने मंगलवार की सहारनपुर में छापेमारी कर अभिषेक शर्मा के प्रतिष्ठान पर छापेमारी की तथा श्रीराम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विभोर राणा के साथ विशाल, बिट्टू ओर सचिन को गिरफ्तार कर अपने साथ लख़नऊ ले गयी, दरअसल लख़नऊ के थाना गोल्फ सिटी में 8 अप्रैल 2024 को अपराध संख्या 182 के तहत हुए मुकदमे में चारो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया, वही अभिषेक शर्मा भी एसटीएफ की गिरफ्त में आया बताया जा रहा है जिसने विभोर राणा सहित चारो अभियुक्तों की पूरी कुंडली का ब्यौरा एसटीएफ को दिया बताया जाता है, वही विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अभिषेक शर्मा राणा परिवार का सबसे विष्वसनीय सदस्य था, सभी ने एबॉट कंपनी की सुपर डिस्ट्रीब्यूटरशिप लेकर करोड़ो रूपये का फ़र्ज़ी कारोबार न केवल खड़ा किया बल्कि कागजो में यह कानूनी व्यापार दिखाते हुए इसको बिहार, बंगाल से लेकर बंग्लादेश तक सप्लाई किया जाता था, इन गिरफ्तारियों के बाद एसटीएफ अभियुक्तों को रिमांड पर लेकर नशे के कारोबार में लिप्त अन्य लोगो तक भी पहुचने को लेकर जांच के दायरे को बढ़ा कर इसकी जड़ तक पहुचने के लिए प्रयासरत है। वही सूत्रों की माने तो आने वाले दिनों में कुछ और खुलासे होने की संभावना से इनकार नही किया जा सकता, वही इन नशे के सौदगरो द्वारा पिछले कई वर्षों में अर्जित की गई करोड़ो की संपत्तियां, होटल, कॉलोनियां, वनिजियिक प्लाट, मकान ओर करोड़ो रूपये ब्याज पर दिए जाने की जानकारियां ओर इनके साथ रहे वह लोग जो समपत्तियो में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सम्मलित रहे है, उनकी जांच की भी सुगबुगाहट ने कुछ लोगो की नींद हराम कर दी बताई जा रही है। वही सूत्रों की माने तो विभोर राणा ओर इसके सहयोगियों को छुड़ाने के लिए एक बड़ा तबका राजनीतिक और धनबल के सहारे से मामले को खत्म कराने के लिए प्रयासरत है जिनमे सहारनपुर के कुछ प्रभावशाली लोगों का सहारा भी लिए जाने की जानकारियां प्राप्त हो रही है, परन्तु प्रदेश के मुखिया द्वारा नशे पर लगाम लगाने के सख्त निर्देश के चलते मामला अब संगीन हो चला है। नशे में लिप्त सौदागर अब किसी भी कीमत पर बक्शे नही जाएंगे।
आलोक अग्रवाल
रमेश सैनी सहारनपुर इंडियन टीवी न्यूज़