नरेश सोनी इंडियन टीवी न्यूज नेशनल ब्यूरो हजारीबाग
स्वतंत्र भारत के साथ झारखंड के निर्माण के पहले भी आंदोलन जल,जमीन और जंगल के लिए झारखंड के आदिवासियों
हजारीबाग: खतियानी परिवार की बैठक पुराना धरना स्थल के नजदीक खतियानी परिवार के केंद्रीय अध्यक्ष बाबू भाई विद्रोही की अध्यक्षता में हुई । बैठक में केंद्रीय महासचिव मोहम्मद हकीम ने कहा कि स्वतंत्र भारत के साथ झारखंड के निर्माण के पहले भी आंदोलन जल,जमीन और जंगल के लिए झारखंड के आदिवासियों ने जिन में सिंधु,कानहु,चांद भैरव शेख भिखारी,बिरसा मुंडा,फुलो झानो दोनों बहनों ने आंदोलन करते हुए शहीद हो गए लेकिन उन्हीं लोगों ने झारखंड आंदोलन की बुनियाद डाल दी, इन आंदोलनकारी ने सीमित दायरे में उलगुलान की लड़ाई करते हुए अपनी जान की कुर्बानी दे दी,लेकिन देश की आजादी के साथ झारखंड का भी आंदोलन तीव्र हो गया, दिशुम गुरु शिबू सोरेन, लालू जी के संयुक्त बिहार में सूरज मंडल के साथ, झारखंड स्वायत्त परिषद का निर्माण कर लिया, राज्य के अस्तित्व में आने के पहले यह पहला मुकाम प्राप्त किया, शिबू सोरेन के जीवन काल में ही झारखंड आंदोलन पुणः अस्तित्व में आ गया, इस आंदोलन में पूर्व सांसद माननीय भुनेश्वर प्रसाद मेहता, एव खतियानी के संस्थापक स्वर्गीय एड नंदी जी का अहम भूमिका रही, इसे भुलाया नहीं जा सकता,तब जाकर 15 नवंबर 2000 ईः को झारखंड एक अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया, लेकिन झारखंड बने हुए 25 वर्ष हो गए,आज तक सरकार यह तय नहीं कर पाई की,जो एड नदी ने स्लोगन दिया था,झारखंडी कौन, झारखंडियों की पहचान। जिसके पास हो खतियान।
यह आंदोलन अपने मुकाम को, प्राप्त नहीं कर सके आंदोलनकारी अपने आंदोलन को सार्थ करता सिद्ध करने में लगा हुआ है, लेकिन झारखंड आंदोलन के बाद बाहरी तत्व सजग हो गए हैं
आज भी यह आंदोलन अलग-अलग टुकड़ियों में झारखंड के लोग लड़ते हैं रहे हैं जिसमे खतियानी परिवार, आदिवासी मूलवासी, के नाम से आंदोलन चला रहे हैं, जो झारखंड के सच्चे हितैशी की तरह आज भी आंदोलन चला रहे हैं इसमें अधिकांश मुखौटा लगाकर झारखंड का दुश्मन विभिन्न नामो से आंदोलन में सक्रिय हैं यहां तक की झारखंड सरकार जल,जंगल,जमीन की अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा लेकिन इस आंदोलन में दो तरह के लोग हैं, एक सत्ता में काबिज होने का आंदोलन कर रहा है, दूसरे वे लोग हैं जो झामुमो राजनीतिक दल बनाकर अस्तित्व में आ रहे हैं झामुमो वाले झारखंड के निर्माण में अपनी भूमिका निश्चित किए हैं और दूसरे लोग हैं जो, झारखंड आंदोलन का नाटक कर रहे हैं, अब झारखंडियों को ठीक-ठीक समझ कर आंदोलन को साथ देना चाहिए अंधेरे और भटकाव में नाआवे।
बैठक में उपस्थित। मेगन प्रसाद मेहता, डाः तनवीर अहमद, बोधी साँव, मोः आशिक, अमर कुमार गुप्ता, मोः फखरुद्दीन, प्रदीप कुमार मेहता, मुन्नी देवी, बिंदु देवी, सुरेश महतो, वो अन्य उपस्थित थे।