पं. रामप्रसाद बिस्मिल जयंती पर डाइट मुरैना में जिला स्तरीय कार्यक्रम एवं निबंध लेखन प्रतियोगिता सम्पन्न
रिपोर्ट अजय सिंह तोमर
जिला मुरैनाकलेक्टर ने दिया राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता एवं राष्ट्रगान के अनिवार्य गायन का संदेश
महान क्रांतिकारी कवि एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती के अवसर पर आज डाइट मुरैना में जिला स्तरीय गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में कलेक्टर श्री जांगिड़ द्वारा मुरैना स्थित शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की प्रतिमा स्थल पर ध्वजारोहण किया गया। इस अवसर पर पुलिस बल द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। तत्पश्चात शहीद पं. रामप्रसाद बिस्मिल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान तोपों की सलामी दी गई तथा पुष्पवर्षा के माध्यम से अमर शहीद को नमन किया गया।
इसके उपरांत कलेक्टर श्री जांगिड़ द्वारा शहीद पं. रामप्रसाद बिस्मिल की स्मृति में प्रज्वलित मशाल को अम्बाह एवं बरवाई के लिए विधिवत रूप से रवाना किया गया। कार्यक्रम में सीईओ जिला पंचायत श्री कमलेश कुमार भार्गव, अपर कलेक्टर श्री अश्विनी कुमार रावत, एसडीएम मुरैना, सहित संबंधित जिला अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर कलेक्टर श्री जांगिड़ ने अपने संबोधन की शुरुआत बिस्मिल जी की अमर पंक्तियों—
“सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-क़ातिल में है”
से करते हुए कहा कि इन दो पंक्तियों ने उस दौर के केवल सैकड़ों या हज़ारों नहीं, बल्कि लाखों युवाओं को आने वाले दो दशकों तक स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया, जिनमें से सैकड़ों युवाओं ने हँसते-हँसते देश के लिए फाँसी के फंदे को स्वीकार किया।
कलेक्टर ने कहा कि कुछ रचनाएँ ऐसी होती हैं, जो केवल एक पीढ़ी ही नहीं बल्कि कई पीढ़ियों में ऊर्जा, साहस और राष्ट्रप्रेम का संचार करती हैं। इसी विचार को आत्मसात करते हुए जिले में “पं. रामप्रसाद बिस्मिल – क्रांतिकारी कवि एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी” विषय पर जिला स्तरीय निबंध लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई।
उन्होंने कहा कि पं. रामप्रसाद बिस्मिल केवल एक क्रांतिकारी ही नहीं थे, बल्कि वे महान कवि, बहुभाषी विद्वान एवं व्यापक दृष्टिकोण वाले चिंतक भी थे। उन्हें हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी सहित अनेक भाषाओं का ज्ञान था। उन्होंने बांग्ला साहित्य की पुस्तकों का अनुवाद किया तथा उर्दू की शिक्षा एक मौलवी से प्राप्त की। वे अंग्रेज़ी माध्यम के विद्यालय में भी शिक्षित हुए थे। कलेक्टर ने यह भी बताया कि बिस्मिल जी ने ‘अमेरिकी क्रांति’ पर भी एक पुस्तक लिखी थी, जो उनके वैश्विक दृष्टिकोण एवं अध्ययनशील प्रवृत्ति को दर्शाती है। उन्होंने अशफाक उल्ला खान के साथ उनकी गहरी मित्रता का उल्लेख करते हुए कहा कि फाँसी के दिन तक—जब रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्र लाहिड़ी एवं रोशन सिंह को अलग-अलग स्थानों पर फाँसी दी गई—वे वैचारिक रूप से एक-दूसरे से जुड़े रहे।
कलेक्टर श्री जांगिड़ ने कहा कि बिस्मिल जी का ‘बिस्मिल’ उपनाम स्वयं उर्दू भाषा से लिया गया है, जो यह संदेश देता है कि राष्ट्रप्रेम जाति, पंथ, धर्म और संप्रदाय से ऊपर होता है। विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की संकीर्ण मानसिकता से बाहर निकलकर समग्र एवं व्यापक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जैसे सीमाओं पर देश की रक्षा करने वाले सैनिक भारत के विभिन्न राज्यों एवं भाषाओं से आकर एक साथ सेवा करते हैं, उसी प्रकार बच्चों में भी देश की एकता एवं अखंडता की भावना विकसित होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यालयों में प्रतिदिन राष्ट्रगान के अनिवार्य गायन पर विशेष बल देते हुए कहा कि आज कई बच्चों को राष्ट्रगान पूर्ण रूप से नहीं आता, जो बच्चों की नहीं बल्कि व्यवस्था की कमी को दर्शाता है। राष्ट्रगान में पूरे भारत की भौगोलिक एवं सांस्कृतिक एकता समाहित है—पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा, द्राविड़, उत्कल, बंग से लेकर गंगा-यमुना तक। प्रतिदिन राष्ट्रगान के गायन से बच्चों में समग्र राष्ट्रबोध विकसित होगा। इसी उद्देश्य से विद्यालयों में प्रतिदिन राष्ट्रगान को अनिवार्य किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न राज्यों के बीच छात्र विनिमय कार्यक्रमों से बच्चों को उत्तर, दक्षिण, पूर्वोत्तर एवं देश के अन्य भागों की संस्कृति को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने बताया कि पूर्व में मध्यप्रदेश और मणिपुर के बीच ऐसा कार्यक्रम हुआ था, जिससे पूर्वोत्तर भारत के प्रति राज्य के लोगों की जागरूकता बढ़ी। उन्होंने यह भी कहा कि मुरैना जिले के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है कि पं.रामप्रसाद बिस्मिल की पारिवारिक जड़ें इसी भूमि से जुड़ी रही हैं, और आज उसी भूमि पर इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन होना जिले के लिए सम्मान की बात है।
*जिला स्तरीय निबंध लेखन प्रतियोगिता*
इस अवसर पर आयोजित जिला स्तरीय निबंध लेखन प्रतियोगिता के अंतर्गत दिनांक 18 दिसंबर 2025 को जिले के समस्त विकासखण्डों से प्राप्त मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं का परीक्षण जिला स्तर पर गठित मूल्यांकन समिति द्वारा किया गया। गहन, निष्पक्ष एवं गुणात्मक मूल्यांकन के उपरांत श्रेष्ठ निबंध लेखन हेतु छात्र-छात्राओं का चयन किया गया। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान गौरी गुप्ता, कक्षा 12वीं, शासकीय कन्या उमावि, पोरसा ने प्राप्त किया। द्वितीय स्थान दिव्यांशी शर्मा, कक्षा 10वीं, शासकीय सांदीपनी उमावि, अम्बाह को प्राप्त हुआ, जबकि तृतीय स्थान प्राची तोमर, कक्षा 12वीं, शासकीय उत्कृष्ट उमावि, मुरैना ने अर्जित किया। इसी क्रम में चतुर्थ स्थान अंशिका शर्मा, कक्षा 12वीं, शासकीय उमावि, सहरैयन का पुरा तथा पंचम स्थान तपस्या परमार, कक्षा 10वीं, शासकीय जी.डी. जैन उमावि, मुरैना को प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम के अंत में चयनित पाँचों छात्राओं को सम्मानित किया गया, जिसमें प्रथम स्थान हेतु ₹11,000, द्वितीय स्थान हेतु ₹7,000, तृतीय स्थान हेतु ₹5,000, चतुर्थ स्थान हेतु ₹2,100 तथा पंचम स्थान हेतु ₹1,100 की राशि के चेक एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों, राष्ट्रप्रेम, क्रांतिकारी चेतना एवं पं. रामप्रसाद बिस्मिल के बहुआयामी व्यक्तित्व के प्रति जागरूकता विकसित करना रहा। छात्राओं द्वारा प्रस्तुत निबंधों में विषय की गहराई, भाषा-प्रवाह एवं विचारों की स्पष्टता स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।
जिला स्तरीय मूल्यांकन समिति के सदस्यों द्वारा चयन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित अधिकारियों द्वारा चयनित सभी छात्र-छात्राओं को उज्ज्वल भविष्य हेतु शुभकामनाएँ दी गईं।