नरेश सोनी इंडियन टीवी न्यूज नेशनल ब्यूरो हजारीबाग
सिविल सर्जन सभागार में आयोजित हुआ विशेष प्रशिक्षण, सर्विलांस और केस मैनेजमेंट पर दिया गया जोर
WHO के विशेषज्ञों ने दी नई चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी, रिपोर्टिंग प्रणाली को और मजबूत बनाने का निर्देश
हजारीबाग। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत बुधवार को सिविल सर्जन सभागार में जिले के स्वास्थ्य बेड़े को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया गया। क्षेत्रीय मलेरिया पदाधिकारी डॉ. श्याम किशोर कान्त, सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार और जिला भी.बी.डी. पदाधिकारी डॉ. कपिलमुनि प्रसाद ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
निजी अस्पतालों की भी बढ़ेगी भागीदारी
इस प्रशिक्षण की खास बात यह रही कि इसमें जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों (MOIC) के साथ-साथ शहर के प्रमुख निजी अस्पतालों के चिकित्सकों ने भी हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, फाइलेरिया और कालाजार जैसे रोगों की समय पर पहचान, प्रभावी उपचार और पारदर्शी रिपोर्टिंग प्रणाली को सुदृढ़ करना था।
जांच और जागरूकता पर विशेष जोर
जिला भी.बी.डी. पदाधिकारी डॉ. कपिलमुनि प्रसाद ने चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा कि वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम में स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका फ्रंटलाइन वॉरियर जैसी है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि भारत सरकार और राज्य मुख्यालय के दिशा-निर्देशों का अक्षरश: पालन किया जाए। किसी भी संदिग्ध मामले में देरी किए बिना जांच सुनिश्चित की जाए ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
WHO विशेषज्ञ ने सिखाए प्रबंधन के गुर
प्रशिक्षण सत्र में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के डॉ. अखिलेश पाटिल ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से सर्विलांस प्रणाली, केस मैनेजमेंट और अंतरविभागीय समन्वय पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने चिकित्सकों के तकनीकी सवालों के जवाब दिए और बताया कि कैसे डेटा रिपोर्टिंग के जरिए बीमारियों के हॉटस्पॉट की पहचान कर उन्हें खत्म किया जा सकता है।
सामूहिक संकल्प के साथ समापन
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित चिकित्सकों ने एकजुट होकर हजारीबाग को वेक्टर जनित रोगों से मुक्त बनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर डॉ. ए.पी. सिंह, डॉ. राहुल कुमार, महेंद्र पाल, मैमुर सुल्तान, फैयाज़ आलम और रमाशंकर प्रसाद सहित कई स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित थे।