बांदा जिले में शिक्षकों ने वर्तमान में जारी समायोजन प्रक्रिया (3.0) को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें प्रक्रिया में भारी अनियमितताओं, आरटीई अधिनियम के उल्लंघन और उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना का आरोप लगाया गया है। शिक्षकों का कहना है कि इस प्रक्रिया से उनके साथ न्याय नहीं हुआ है।
ज्ञापन में बताया गया है कि समायोजन प्रक्रिया में कनिष्ठ शिक्षकों का समायोजन किया गया है, जो माननीय उच्च न्यायालय द्वारा कनिष्ठ शिक्षकों के समायोजन पर रोक लगाने के पूर्व के फैसले का सीधा उल्लंघन है।
कनिष्ठ शिक्षकों के चयन में भी गंभीर अनियमितताएं बरती गई हैं। कहीं जनपद स्तर पर नियुक्ति को आधार माना गया, तो कहीं विद्यालय में ठहराव को। कुछ मामलों में वरिष्ठ शिक्षकों को समायोजित कर दिया गया, जबकि कुछ अन्य में न वरिष्ठता देखी गई और न ही कनिष्ठता, बल्कि मध्य के शिक्षकों का समायोजन कर दिया गया।
इसके अतिरिक्त, कुछ विद्यालयों में एक ही विषय के दो शिक्षक होने के बावजूद, एक विषय वाले शिक्षक को हटा दिया गया। वहीं, मार्च 2026 में सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों को भी शासनादेश के विरुद्ध सुदूरस्थ विद्यालयों में समायोजित कर दिया गया है।
जारी किए गए समायोजन आदेशों में कई शिक्षकों को उनके वर्तमान विद्यालय के पास का विद्यालय आवंटित न करके जानबूझकर दूर के विद्यालय दिए गए। जबकि कुछ विशेष लोगों को अनुचित लाभ देते हुए जिला मुख्यालय के अधिक नजदीक के विद्यालयों में समायोजित कर दिया गया। इसे शासनादेश का खुला उल्लंघन और भेदभावपूर्ण बताया गया है।
शिक्षकों ने विनम्र अनुरोध किया है कि इस समायोजन प्रक्रिया को तत्काल निरस्त किया जाए और उचित कार्यवाही की जाए ताकि प्रभावित शिक्षकों को न्याय मिल सके।
ब्यूरो चीफ ताहिर अली बांदा से