भारत को महाशक्ति नहीं, ‘महान शक्ति’ बनना है, विभावि में गूंजा चरित्र निर्माण का स्वर
नरेश सोनी इंडियन टीवी न्यूज नेशनल ब्यूरो हजारीबाग।
हजारीबाग: विनोबा भावे विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में स्वामी विवेकानंद जयंती के उपलक्ष्य में शनिवार को एक ओजस्वी भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। ‘चरित्र निर्माण: विकसित भारत की पृष्ठभूमि’ विषय पर आयोजित इस प्रतियोगिता में वक्ताओं ने भारत के भविष्य की रूपरेखा पर गहन मंथन किया। कार्यक्रम में यह स्वर प्रमुखता से उभरा कि भारत की विकास यात्रा पाश्चात्य अंधानुकरण पर नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों और वैश्विक शांति पर आधारित होगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ. सुबोध कुमार सिंह ने विकसित भारत की एक अलग ही तस्वीर पेश की। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि भारत को ऐसा विकसित देश नहीं बनना है जो दूसरे राष्ट्र के राष्ट्रपति का अपहरण करता हो, अपने ही नागरिकों की बोलने की आजादी छीनता हो या पड़ोसियों की जमीन पर कब्जा कर बेवजह युद्ध थोपता हो। उनका कहना था कि भारत एक ऐसा राष्ट्र बनेगा जिसका चरित्र शांति, न्याय, सहयोग और सद्भावना की मिसाल होगा। वहीं, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विभागाध्यक्ष डॉ. सुकल्याण मोइत्रा ने अपने संबोधन में एक नई अवधारणा रखते हुए कहा कि भारत को केवल ‘महाशक्ति’ या ‘प्रमुख शक्ति’ बनकर नहीं रुकना है, बल्कि इसे एक ‘महान शक्ति’ के रूप में खुद को स्थापित करना होगा।
प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने भी अपने विचारों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कड़े मुकाबले के बीच तृतीय समसत्र की छात्रा आयुषी सिंह ने अपनी वाकपटुता से प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसी समसत्र के पिंटू रजक ने हिंदी में प्रभावशाली भाषण देते हुए द्वितीय स्थान हासिल किया, जबकि सुप्रिती भारती तीसरे स्थान पर रहीं। आयुषी और सुप्रिती ने अंग्रेजी माध्यम में अपनी बात रखी।
प्रतियोगिता में कुल सात विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया, जिनके प्रदर्शन का मूल्यांकन शोधार्थी धर्मेंद्र कुमार और महेंद्र पंडित ने निर्णायक की भूमिका में किया।
इस आयोजन को सफल बनाने में शोधार्थी विकास कुमार यादव और इंस्पायर फेलो अनन्या शर्मा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के दौरान विभागीय प्राध्यापक डॉ. अजय बहादुर सिंह, बरकट्ठा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बलदेव राम और केबी महिला महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापिका मेरी नेली पुष्पा कुजूर सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी व विद्यार्थी उपस्थित रहे। घोषित विजेताओं को आगामी 19 जनवरी को विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले विवेकानंद जयंती समारोह में रामकृष्ण मिशन रांची के सचिव स्वामी भविष्यानंद जी के हाथों पुरस्कृत किया जाएगा।