हरिकेश मिश्रा इंडियन न्यूज़ टीवी तहसील रिपोर्टर
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में अपराधियों के पैर में गोली मारने (हाफ एनकाउंटर) की बढ़ती परंपरा पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि किसी भी आरोपी को सजा देने का अधिकार केवल न्यायपालिका के पास है, पुलिस के पास नहीं।
“सोशल मीडिया की वाहवाही के लिए न चलाएं गोली”
अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारियों को सिर्फ सोशल मीडिया पर ‘हीरो’ बनने, वाहवाही लूटने या प्रमोशन पाने के उद्देश्य से गोली नहीं चलानी चाहिए। कोर्ट ने साफ किया कि कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन ‘शॉर्टकट’ अपनाकर न्याय करना संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ है।
अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन सुनवाई के दौरान बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि अगर कोई आरोपी आत्मसमर्पण कर रहा है या हिरासत में है, तो उस पर बल प्रयोग के नाम पर पैर में गोली मारना मानवाधिकारों और कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है। कोर्ट ने आगाह किया कि पुलिस की भूमिका जांच करने और अपराधी को अदालत के सामने पेश करने तक सीमित है, फैसला सुनाने की नहीं।
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