वाराणसी से प्रवीण मिश्रा की रिपोर्ट।
इंडियन टीवी न्यूज नैशनल।
पांडेपुर लालपुर। वाराणसी में घूसखोरी के आरोपित की गिरफ्तारी के बाद मामला अब केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रह गया है। पुलिस अनुशासन, जवाबदेही और सिस्टम की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई के बाद आरोपी के समर्थन में दिखाई गई कथित सक्रियता अब जांच का विषय बन चुकी है।
श्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया आरोपित एंटी करप्शन टीम ने कार्रवाई करते हुए 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए घूसखोरी के आरोपित को रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। इस दौरान उसके साथ मौजूद सिपाही को भी हिरासत में लिया गया।
गिरफ्तारी के बाद बढ़ी हलचल आरोप है कि घूसखोरी के आरोपित की गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही उसके करीबी पुलिसकर्मियों को व्हाट्सएप और फोन कॉल के जरिए एकत्र किया गया। कुछ ही समय में पहले चौकी और फिर थाने पर पुलिसकर्मियों की भीड़ जुट गई।
थाने तक पहुंचा दबाव सूत्रों के अनुसार, घूसखोरी के आरोपित को छुड़ाने के उद्देश्य से एंटी करप्शन टीम पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया। थाने में हंगामा, अभद्र भाषा और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसे आरोप भी सामने आए हैं।
CCTV और सोशल मीडिया बने अहम साक्ष्य पूरी घटना थाने और आसपास लगे CCTV कैमरों में कैद होने की बात कही जा रही है। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो भी जांच एजेंसियों के लिए अहम साक्ष्य बन सकते हैं।
कानून से ऊपर कोई नहीं कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि घूसखोरी के आरोपित को बचाने के प्रयास की पुष्टि होती है, तो यह न केवल गंभीर अनुशासनहीनता है बल्कि BNS के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में भी आता है।
निष्पक्ष जांच की मांग।
मामले को लेकर उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच, FIR दर्ज करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि घूसखोरी के आरोपित के मामले में सिस्टम कितना सख्त और पारदर्शी रुख अपनाता है।।