बरेली। बच्चों की सेहत को लेकर फैसले जन्म के साथ ही शुरू हो जाने चाहिए। क्या खिलाना है, कब से ब्रश कराना है, कितना खेल जरूरी है—इन सबका सीधा असर उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ता है। छोटे-छोटे फैसले ही आगे चलकर बड़ी आदतों का रूप लेते हैं। हर साल अक्टूबर को चिल्ड्रन हेल्थ मंथ के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए पांच जरूरी आदतें अपनाना बेहद आवश्यक है।
न्यूट्रिशन से नहीं करें समझौता बचपन की डाइट ही पूरी जिंदगी की सेहत की नींव रखती है। बच्चों के भोजन में फल, हरी सब्जियां, दालें, फाइबर, फिश और लो-फैट डेयरी उत्पाद शामिल करें। ज्यादा नमक, चीनी, कोल्ड ड्रिंक और पैकेज्ड फूड से दूरी बनाएं। जंक फूड की जगह घर का संतुलित और पौष्टिक भोजन दें।
हर उम्र में रखें एक्टिव 3 से 5 साल तक के बच्चों को रोज कम से कम 3 घंटे एक्टिव खेल-कूद करना चाहिए।
6 से 17 साल के बच्चों के लिए प्रतिदिन 60 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी जरूरी है। इसमें दौड़ना, तैराकी, साइकिलिंग, आउटडोर स्पोर्ट्स और हल्की स्ट्रेंथ एक्सरसाइज शामिल होनी चाहिए। इससे मोटापा, डायबिटीज और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से बचाव होता है।
‘क्लीन प्लेट रूल’ की जबरदस्ती न करें अगर बच्चा खाना पूरा नहीं खा पा रहा है तो जबरदस्ती न करें। बच्चे खुद समझ जाते हैं कि उनकी भूख कब पूरी हो गई। उन्हें धीरे-धीरे नए स्वाद से परिचित कराएं, लेकिन दबाव न बनाएं। सकारात्मक माहौल में खिलाने से अच्छी खाने की आदत विकसित होती है।
डेंटल हेल्थ पर दें खास ध्यान बच्चों में पहला दांत आते ही ब्रश की आदत डालें।
3 साल तक बहुत थोड़ी मात्रा में टूथपेस्ट इस्तेमाल करें। उसके बाद मटर के दाने जितनी मात्रा पर्याप्त है। हर 6 महीने में डेंटल चेकअप जरूर कराएं, ताकि दांतों से जुड़ी समस्याएं शुरुआती स्तर पर ही पकड़ी जा सकें।
हाथ धोने की सही आदत बच्चों को सिखाएं कि बाथरूम से आने के बाद, नाक साफ करने के बाद, बाहर खेलने के बाद और खाने से पहले हाथ धोना जरूरी है। कम से कम 20 सेकंड तक साबुन से हाथ मलकर साफ पानी से धोना चाहिए। यह छोटी सी आदत कई बीमारियों से बचा सकती है।
वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र कुमार ने कहा कि पढ़ाई जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरी है सही जीवनशैली। अगर बचपन से ये पांच आदतें बच्चों में डाल दी जाएं, तो वे न सिर्फ शारीरिक रूप से मजबूत बनेंगे बल्कि मानसिक रूप से भी आत्मविश्वासी और स्वस्थ रहेंगे। माता-पिता की सजगता ही बच्चों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की सबसे बड़ी गारंटी है।
प्रवन पाण्डेय ITN National जिला संवाददाता बरेली