प्रवीण मिश्रा की रिपोर्ट। इंडियन टीवी न्यूज नैशनल।।
अमरेंद्र किशोर|डिजिटल और टीवी चैनलों की चमक-दमक तथा तात्कालिक समाचारों की भीड़ में यह मान लेना कि अख़बार अप्रासंगिक हो चुके हैं, एक भ्रामक सोच है। वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट है। विश्वसनीयता, तथ्यात्मकता और जवाबदेही की कसौटी पर आज भी प्रिंट मीडिया सबसे आगे खड़ा है। यही कारण है कि पाठक, बाज़ार और सरकार—तीनों की प्राथमिकताओं में अख़बार आज भी निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता अध्ययन संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट डिजिटल समाचार रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि स्थापित समाचार संस्थानों पर लोगों का भरोसा केवल ऑनलाइन मंचों की तुलना में कहीं अधिक स्थिर है। वर्षों की संपादकीय परंपरा, तथ्य-जांच की सख्त प्रक्रिया और कानूनी जवाबदेही ने इस भरोसे को मजबूत बनाया है। डिजिटल माध्यम में समाचार की गति तेज है, परंतु सत्यापन की प्रक्रिया कई बार कमजोर रह जाती है।
भारत के संदर्भ में राष्ट्रीय समाचार एजेंसियों से जुड़े वरिष्ठ संपादकों का मानना है कि भारत में विश्वसनीय समाचार का आधार आज भी प्रिंट मीडिया ही है। अदालतों, सरकारी अभिलेखों और नीतिगत चर्चाओं में आज भी अख़बार की कतरन प्रमाण के रूप में स्वीकार की जाती है। डिजिटल लिंक बदल सकते हैं, पर मुद्रित पृष्ठ स्थायी दस्तावेज़ बन जाते हैं।
विज्ञापन जगत में भी अख़बारों की सशक्त भूमिका बनी हुई है। वैश्विक मीडिया संगठनों की रिपोर्टें बताती हैं कि उभरते बाज़ारों में प्रिंट माध्यम आज भी प्रभावशाली विज्ञापन मंच है। भारत जैसे देश में, जहाँ क्षेत्रीय भाषाओं के अख़बारों का व्यापक नेटवर्क है, पाठक अख़बार को गंभीरता से पढ़ते हैं, जिससे विज्ञापन की विश्वसनीयता बढ़ती है।
प्रसार से जुड़े आंकड़े दर्शाते हैं कि क्षेत्रीय अख़बारों की पाठक संख्या स्थिर बनी हुई है। यह सिद्ध करता है कि प्रिंट और डिजिटल माध्यम प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि पूरक हैं। अनेक मीडिया समूह अब दोनों माध्यमों को साथ लेकर चल रहे हैं।
सरकारी नीतियों में भी प्रिंट माध्यम को आज भी केंद्रीय स्थान प्राप्त है। सरकारी सूचनाएँ, निविदाएँ और विधिक घोषणाएँ आज भी अख़बारों में प्रकाशित करना आवश्यक माना जाता है, क्योंकि उन्हें कानूनी मान्यता प्राप्त होती है।
अख़बार केवल सूचना का साधन नहीं, बल्कि एक संगठित आर्थिक तंत्र भी हैं, जिससे लाखों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। यह तंत्र लोकतांत्रिक विमर्श को दिशा देने का भी कार्य करता है।
स्पष्ट है कि सूचना के इस अराजक युग में अख़बार सत्य और स्थिरता का स्तंभ हैं। वे समाज को तथ्य, संदर्भ और भरोसा प्रदान करते हैं। डिजिटल युग में भी अख़बारों की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है।
अख़बार आज भी लोकतंत्र, समाज और बाज़ार की आधारशिला बने हुए हैं।