वाराणसी से प्रवीण मिश्रा की रिपोर्ट।
इंडियन टीवी न्यूज नैशनल।
वाराणसी|रमजान का आगाज होते ही दुनिया भर के मुसलमान इस पाक महीने की इबादतों में मशगूल हो जाते हैं। रोजा रखना नमाज पढ़ना तरावीह अदा करना, कुरआन की तिलावत करना सदका खैरात करना और ज़िक्र-ओ-दुआ में वक्त गुजारना इस महीने की खासियतें हैं जब रमजान का महीना आता है तो जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं, जहन्नम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं और शैतान जंजीरों में जकड़ दिए जाते हैं इस महीने में हर नेक अमल का अज्र (सवाब) बढ़ा दिया जाता है। एक नफ़्ल इबादत का सवाब एक फर्ज. के बराबर हो जाता है और फर्ज. इबादत का सवाब 70 गुना तक बढ़ जाता है रमजान की तीन अशराएँ रमजान को तीन हिस्सों में बांटा गया है, 1. पहला अशरा रहमत का यह महीने के पहले 10 दिन होते हैं जिनमें अल्लाह की बेपनाह रहमतें नाज़िल होती हैं इस दौरान ज्यादा से ज्यादा दुआ करें कि अल्लाह हम पर रहमत फरमाए और हमारी नेकियों को कुबूल करे 2. दूसरा अशरा मगफि रत माफी का अगले 10 दिन मगफि रत के हैं, यानी अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ करता है हमें इस दौरान गुनाहों से तौबा करनी चाहिए और अल्लाह से माफी मांगनी चाहिए 3. तीसरा अशरा जहन्नम से छुटकारे का आखिरी 10 दिन जहन्नम से आजादी पाने का जरिया होता हैं।।