13 गढ़वाल राइफल्स की स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में मेरठ में एक भव्य एवं ऐतिहासिक समारोह का आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि रेजिमेंट की गौरवशाली परंपरा, वीरता और भाईचारे की पुनर्पुष्टि का सशक्त अवसर रहा। समारोह में सेवारत अधिकारी, जेसीओ, जवान, पूर्व सैनिक एवं उनके परिवार बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
नजीबाबाद के मेजर दानिश फारूकी को इस अवसर पर विशेष रूप से आमंत्रित किया। मेजर फारूकी ने मार्च 2017 से सितंबर 2018 तक 13 गढ़वाल राइफल्स के साथ अटैचमेंट के दौरान सेवाएं दीं। इस अवधि में उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में एलएसी पर उत्कृष्ट कार्य किया। तत्पश्चात वर्ष 2018 में त्रिवेंद्रम (केरल) में आई भीषण बाढ़ के दौरान पटलन के साथ राहत एवं बचाव अभियान में उल्लेखनीय योगदान दिया।
वर्तमान में मेजर दानिश फारूकी सेना में असिस्टेंट जज एडवोकेट जनरल के पद पर जम्मू-कश्मीर में तैनात हैं। स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर उन्होंने जवानों को संबोधित करते हुए अनुशासन, मनोबल एवं रेजिमेंटल एथोस(संस्कार) के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सेना में अनुशासन केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि चरित्र और कर्तव्यनिष्ठा की आधारशिला है। उच्च मनोबल ही कठिनतम परिस्थितियों में विजय का मार्ग प्रशस्त करता है।
समारोह के दौरान “ऑपरेशन सिंदूर” में सेना की भूमिका पर भी गंभीर चिंतन-मनन किया गया तथा बदलते सुरक्षा परिदृश्य में सेना की जिम्मेदारियों पर विचार साझा किए गए। मेजर फारूकी ने कहा कि सेना का प्रत्येक अभियान राष्ट्र की संप्रभुता, सुरक्षा और सम्मान की रक्षा के लिए समर्पित होता है।
इस स्वर्ण जयंती समारोह का सफल आयोजन पटलन नेतृत्व के दूरदर्शी मार्गदर्शन में हुआ। आयोजन की सूक्ष्म योजना, उत्कृष्ट क्रियान्वयन एवं पूर्व सैनिकों से आत्मीय संवाद ने पूरे कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया। समारोह के दौरान रेजिमेंट की गौरवशाली विरासत और बलिदान की परंपरा को नमन किया गया।
यह स्वर्ण जयंती 13 गढ़वाल राइफल्स के इतिहास में एक मील का पत्थर सिद्ध हुई, जिसने सभी अधिकारियों, जवानों और पूर्व सैनिकों के मन में रेजिमेंट के प्रति समर्पण और गर्व की भावना को और सुदृढ़ किया अंत में जय बद्री विशाल और जय हिन्द के नारों से कार्यक्रम का समापन किया गया।