देश में कमर्शियल गैस का जो संकट उत्पन्न हुआ है, उसके विरोध में कांग्रेस देशभर में धरना प्रदर्शन कर रही है। कांग्रेस के नेताओं का आरोप है कि यह संकट केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों के कारण हुआ है। हालांकि अभी रसोई गैस की कोई किल्लत नहीं है, लेकिन फिर भी राजनीतिक कारणों से कांग्रेस ने अपने विरोध में रसोई गैस को भी शामिल कर लिया है। यह माना कि देश में कमर्शियल गैस की किल्लत है, लेकिन सवाल उठता है कि क्या यह किल्लत मोदी सरकार की वजह से है? सब जानते हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच जो युद्ध हो रहा है, उसकी वजह से भारत में नहीं बल्कि दुनिया भर में तेज और गैस की किल्लत हो गई है। कांग्रेस के नेता खाली सिलेंडर लेकर कितना भी प्रदर्शन करे, लेकिन समझदार लोग जानते हैं कि तेल और गैस एक प्राकृतिक खनिज है। ऐसे खनिज का उत्पादन कोई सरकार अपने देश में नहीं कर सकती। जिस स्थान पर यह प्राकृतिक खनिज है, उसी देश का इस खनिज पर एकाधिकार है। भारत में खपत का मात्र 20 प्रतिशत तेल और गैस उत्पन्न होता है। शेष 80 प्रतिशत उन देशों से मंगाया जाता है, जहां इनके भंडार है। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने से पहले देश में कमर्शियल गैस की कोई किल्लत नहीं थी, क्योंकि मोदी सरकार देश की मांग के अनुरूप गैस का आयात कर रही थी, लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद जब निर्यातक देशों से गैस आ ही नहीं रही है तो फिर कमर्शियल गैस कहां से लाई जाए। जो लोग गैस के अभाव को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं उन्हें एक बार ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे भीषण युद्ध से उत्पन्न हालातों को देख लेना चाहिए। यह युद्ध दो देशों तक सीमित नहीं रहा है बल्कि खाड़ी के देशों तक फैल गया है। किसी को भी नहीं पता कि यह युद्ध कितने दिन चलेगा। जब दो बड़े देशों के बीच युद्ध होता है तो दुनिया भर में परेशानी होती ही है। कांग्रेस के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कितनी भी गालियां दे, लेकिन सच्चाई यह है कि मोदी की नीतियों की वजह से भारत में अभी तक भी पेट्रोल-डीजल की किल्लत नहीं हुई है। जहां तक कमर्शियल गैस का सवाल है तो अब उस होर्मुज मार्ग से भारतीय जहाज आने लगे हैं, जिस पर ईरान ने प्रतिबंध लगा रखा था। यदि मोदी की कूटनीति नहीं होती तो इस मार्ग से भारत के लिए जहाज का परिवहन नहीं हो सकता था। कांग्रेस के नेताओं को यह भी समझना चाहिए कि खाड़ी के देशों में एक करोड़ भारतीय काम कर रहे है। यह मोदी सरकार ही है जो हर भारतीय को युद्ध में सुरक्षित अपने देश ला रही है। इन एक करोड़ भारतीयों में मुस्लिम समुदाय के युवा भी शामिल है। कांग्रेस को यह नहीं भूलना चाहिए कि जब दुनिया के मुसलमान भीषण संकट में है, तब भारत में रहने वाले 25 करोड़ मुसलमानों को कोई परेशानी नहीं है। रमजान माह में भारत के मुसलमान पूरे अमन चैन के साथ अकीदत प्रकट कर रहे हैं, जबकि दूसरे मुस्लिम देशों में मुसलमानों को रमजान माह में अपनी जान के लाले पड़े हैं। मौजूदा समय में इस वैश्विक संकट में भारत के हर समझदार नागरिक को अपनी सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में घरेलू गैस की कोई कमी नहीं है। सरकार ने बताया कि सामान्य दिनों में पचास लाख उपभोक्ता प्रतिदिन सिलेंडर की बुकिंग कराते थे, लेकिन इन दिनों प्रतिदिन 80 लाख उपभोक्ता रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग करवा रहे है। जिस उपभोक्ता के पास एक अतिरिक्त सिलेंडर है, वह भी चाहता है कि उसके घर में दोनों सिलेंडर भर जाए। सरकार ने लोगों से आग्रह किया है कि किसी भी प्रकार से घबराने की जरुरत नहीं है। सरकार ने कमर्शियल गैस सिलेंडरों पर पूर्व में जो प्रतिबंध लगाया था उसे भी धीरे धीरे सामान्य किया जा रहा है। आवश्यक सेवाओं वाले संस्थानों में कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई शुरू कर दी गई है। अब धीरे धीरे होटल रेस्टोरेंट आदि में भी कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई शुरू की जा रही है।
पैर छूकर आशीर्वाद:
13 मार्च को असम की राजधानी गुवाहाटी में आयोजित एक समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के चाय बागान की एक बुजुर्ग महिला श्रमिक के पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त किया। मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि असम में चाय की पत्तियों का जो उत्पादन होता है उसकी महक गुजरात तक है और मैंने इसी चाय को रेलवे स्टेशन पर बेचा भी है। जब दुनिया में भीषण युद्ध की वजह से हाहाकार मचा हुआ है, तब भारत के प्रधानमंत्री एक महिला श्रमिक के पैद छूकर आशीर्वाद ले रहे हैं। मोदी को प्राप्त यह आशीर्वाद ही भारत के हर नागरिक के काम आ रहा है।
रमेश सैनी सहारनपुर इंडियन टीवी न्यूज़