सोनभद्र/दुद्धी।(विवेक सिंह)
तीन वर्ष पुराने एनडीपीएस(NDPS) केस में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 10 आरोपियों को बरी कर दिया। पुलिस ने मामले में लगभग 2.180 किलो हेरोइन बरामद कर एक बड़े ड्रग गिरोह का पर्दाफाश होने का दावा किया था, लेकिन अदालत में यह दावा साबित नहीं हो सका।
विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस(NDPS )मामले में सुनवाई के बाद स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को “संदेह से परे” साबित करने में विफल रहा। इस केस को थाना राबर्ट्सगंज क्षेत्र से जोड़ा गया था, जहां पुलिस ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया था और इसे जिले की बड़ी सफलता के रूप में प्रस्तुत किया गया था।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता शादाब आलम ने अदालत में जांच प्रक्रिया की कई व्यावहारिक खामियों पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि जब पुलिस टीम और सिटी सीओ घटना स्थल पर मौजूद थे, उस समय संबंधित अधिकारियों और गवाहों के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) को केस डायरी का हिस्सा नहीं बनाया गया, जबकि यह महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता था।
इसके अलावा बरामदगी से जुड़े आंकड़े भी विरोधाभासी मिले। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार एक आरोपी के पास से केवल 1.5 ग्राम हेरोइन बरामद दिखाई गई, जबकि उसमें से 5 ग्राम नमूना लेकर जांच के लिए भेजने का दावा किया गया। अधिवक्ता ने इसे “गणितीय तौर पर असंभव” बताते हुए कार्यवाही की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए।
मामले में फॉरेंसिक रिपोर्ट और पुलिस के बयानों के बीच दर्ज विरोधाभास ने साक्ष्य की शुद्धता पर और सवाल खड़े कर दिए। विवेचक के अनुसार नमूना कपड़े के बंडल में सील कर भेजा गया था, जबकि विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट में उसे प्लास्टिक के डिब्बे में टेप से बंद बताया गया। इस टकराव ने अदालत को यह निष्कर्ष निकालने पर मजबूर किया कि नमूना विश्वसनीय नहीं माना जा सकता।
सभी पक्षों की दलीलें और साक्ष्यों की समीक्षा करने के बाद अदालत ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/21 के तहत दर्ज इस मामले में सभी 10 आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को कानूनी रूप से साबित करने में असफल रहा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि एनडीपीएस जैसे गंभीर मामलों में जांच की पारदर्शिता, नमूनों के सीलिंग और रिकॉर्ड–रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, छोटी‑छोटी प्रक्रियात्मक चूक भी पूरे केस को निरस्त कर सकती हैं, जैसा कि इस मामले में देखने को मिला।