राजेश कुमार तिवारी इंडियन टीवी न्यूज़
मध्य प्रदेश कटनी। डिजिटल युग में तेजी से फैलती सूचनाओं के बीच पत्रकारिता की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बिना किसी शैक्षिक योग्यता या प्रशिक्षण के लोगों के पत्रकारिता में प्रवेश को लेकर अब आवाजें तेज होने लगी हैं। जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया (रजि.) ने इस मुद्दे को उठाते हुए पत्रकारिता के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता निर्धारित करने की मांग की है।
संस्था के मध्य प्रदेश संयोजक हरिशंकर पाराशर ने कहा कि आज कोई भी व्यक्ति स्वयं को पत्रकार घोषित कर सोशल मीडिया के माध्यम से खबरें प्रसारित कर रहा है, जिससे समाज में भ्रम की स्थिति बन रही है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है, जिसमें सत्यापन, निष्पक्षता और नैतिकता का विशेष महत्व होता है।
उन्होंने बताया कि बिना प्रशिक्षण के पत्रकारिता में आने से फेक न्यूज, भ्रामक जानकारी और सनसनीखेज खबरों का प्रसार बढ़ा है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा बन सकता है। ऐसे में देश में पत्रकारिता के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता निर्धारित करना आवश्यक हो गया है।
पाराशर ने सुझाव दिया कि कम से कम स्नातक स्तर की शिक्षा के साथ पत्रकारिता या मास कम्युनिकेशन में डिग्री या डिप्लोमा अनिवार्य किया जाना चाहिए। साथ ही सरकार से राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकारों के लिए पंजीकरण प्रणाली लागू करने की मांग भी की गई, जिसमें शैक्षिक योग्यता को आधार बनाया जाए।
उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों—इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत युवा पत्रकारों को प्रशिक्षण, पहचान और सुरक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है, वहीं फेक न्यूज फैलाने वालों पर सख्ती की मांग भी उठाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और इसकी मजबूती के लिए प्रशिक्षित एवं योग्य पत्रकारों की आवश्यकता है। इस दिशा में सभी पत्रकारों से एकजुट होकर इस मांग को सरकार तक पहुंचाने की अपील की गई है।