रिपोर्टर: जाकिर जंकार आहवा, डांग
डांग जिले के माध्यमिक शिक्षा क्षेत्र में एक सकारात्मक और प्रेरणादायक बदलाव देखने को मिल रहा है। वोकेशनल विषयों के प्रभावी अमल से जिले में छात्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और खासकर ड्रॉपआउट दर में कमी आई है।
वर्तमान में डांग जिले की कई माध्यमिक स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर, कृषि, सिलाई कार्य, ब्यूटी पार्लर तथा टूरिज्म और होटल मैनेजमेंट जैसे विभिन्न ट्रेड के तहत वोकेशनल कोर्स चलाए जा रहे हैं। इन कोर्सों के माध्यम से छात्रों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि रोजगारपरक कौशल भी प्राप्त हो रहा है।
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, डांग द्वारा स्कूलों को आवश्यक उपकरण, अनुदान और प्रशिक्षकों की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है, जिसके कारण यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक लागू हो पाया है।
इस पहल की विशेष बात यह है कि वोकेशनल प्रशिक्षण के दौरान छात्रों द्वारा बनाए गए उत्पादों का स्कूल स्तर पर ही विक्रय किया जाता है और उससे प्राप्त आय को छात्रों के बीच समान रूप से वितरित किया जाता है। इससे छात्रों में आत्मनिर्भरता की भावना विकसित होती है और वे पढ़ाई के साथ-साथ आय भी अर्जित कर सकते हैं।
डांग जिले में रोजगार के लिए छात्रों और उनके अभिभावकों का पलायन एक बड़ी समस्या थी, जिसके कारण ड्रॉपआउट दर बढ़ रही थी। लेकिन इस प्रयोग से अब छात्र स्कूल से जुड़े रह रहे हैं और उन्हें दूसरे जिलों में जाने की आवश्यकता कम हो गई है।
पिछले दो वर्षों के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप इस वर्ष कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षाओं में 100 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की गई, जो डांग जिले के लिए गर्व की बात है।
इस पहल के तहत सरकारी माध्यमिक विद्यालय खाटला में कक्षा 9 के छात्रों ने टमाटर और बैंगन की सफल खेती की, जिसका उपयोग छात्रावास में किया गया। इसी तरह 30 जनवरी 2026 को सरकारी माध्यमिक विद्यालय लहानचर्या में कृषि ट्रेड के छात्रों ने किचन गार्डन में उगाए गए फूलों की कटाई की और आहवा-सापुतारा रोड पर स्टॉल लगाकर बिक्री की। इस बिक्री से कुल 720 रुपये की आय हुई, जिसमें से 520 रुपये खुले बाजार से और 200 रुपये छात्रावास को सब्जी आपूर्ति से प्राप्त हुए।
इस प्रकार, वोकेशनल शिक्षा के माध्यम से छात्रों में शिक्षा के प्रति रुचि, उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ा है। शिक्षा, कौशल और आय के इस समन्वय से डांग जिले में एक सफल मॉडल विकसित हुआ है, जो अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है।