रीवा ब्यरो चीफ रिप्पू पाण्डेय
जिस पिता ने उंगली पकड़कर चलना सिखाया, आज उसी पिता के साए से भाग रही है एक बच्ची। रीवा एसपी कार्यालय की दहलीज आज एक ऐसी बेबस बेटी की गवाह बनी है, जिसकी आँखों में काजल नहीं, बल्कि ‘कत्ल’ होने का खौफ तैर रहा है।
‘शान’ की वेदी पर चढ़ती एक बेटी की बगावत! मामला किसी फिल्म का नहीं, हमारे अपने रीवा का है। गुनाह? सिर्फ इतना कि एक बेटी ने बालिग होने के नाते अपनी जिंदगी का फैसला खुद लेने की हिमाकत कर दी। लड़का उसी की जाति का है, उसी के गांव का है, लेकिन समाज के तथाकथित पहरेदारों को ये ‘अपनी मर्जी’ रास नहीं आई।
जैसे ही घर वालों को पता चला, सबसे पहले उसका कॉलेज छुड़ा दिया गया। उसके सपनों को घर के अंधेरे कोनों में कैद कर दिया गया। मोबाइल छीन लिया गया, संपर्क काट दिए गए और उसे घर में ‘नजरबंद’ कर दिया गया। उसकी चीखों को अनसुना कर उसके सौदे (जबरन शादी) की तैयारी होने लगी।
जब जुल्म की इंतहा हो गई, तो उस बेटी ने अपनी जान बचाने के लिए घर की दहलीज लांघी। भोपाल के आर्य समाज मंदिर में अपने प्रेमी के साथ सात फेरे लेकर वो कानूनन पत्नी तो बन गई, लेकिन उसके अपने ही घर वाले उसके ‘जल्लाद’ बन बैठे। जैसे ही शादी की खबर लगी, उसे जान से मारने की धमकियां दी जाने लगीं। हद तो तब हो गई जब अमहिया थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी गई, ताकि कानून का इस्तेमाल कर उसे वापस मौत के मुंह में लाया जा सके।
रीवा एसपी कार्यालय में खड़ी उस बेटी की कांपती आवाज ने सबको झकझोर दिया जब उसने हाथ जोड़कर कहा— “पापा, हमें मारिए मत… हमें बस जीवित रहने दीजिए। हमने कुछ गलत नहीं किया है।”
पूरा विंध्य क्षेत्र पूछ रहा है— क्या एक ही बिरादरी में प्यार करना भी अब ‘ऑनर किलिंग’ का सबब बनेगा? क्या प्रशासन इन दो मासूमों को वो सुरक्षा दे पाएगा, जिसकी गुहार लेकर वो साहब की चौखट पर आए हैं?
हम इस बेटी की पहचान गुप्त रख रहे हैं, क्योंकि उसके पिता की ‘झूठी शान’ की तलवार उसकी गर्दन पर लटक रही है।
साहब! ये सिर्फ एक न्यूज़ नहीं है, ये दो जिंदगियों की आखिरी उम्मीद है। प्रशासन जागे, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए!