फतेहगढ़ वन परिक्षेत्र अधिकारी की मुश्किलें अब बढ़ने वाली हैं। आरोप है कि झूठे केस में फंसाने की नीयत से की गई हरकत का मामला अब प्रदेश के मुखिया और हाई कोर्ट तक पहुंच गया है।
फतेहगढ़ रेंजर रवि भदौरिया अब कानून के शिकंजे में फंसते नजर आ रहे हैं। आरोप है कि जंगल कटाई की शिकायत करने वाले व्यापारी प्रमोद गुप्ता को झूठे वन अपराध के केस में फंसाने की नीयत से रचा गया पूरा खेल अब उन पर ही भारी पड़ने वाला है।
पीड़ित प्रमोद गुप्ता अब न्यायिक लड़ाई लड़ते हुए मुख्यमंत्री को भी ज्ञापन सौंप चुके हैं अब मामला हाई कोर्ट में चला गया है
CM हेल्पलाइन 18.02.26 को की गई शिकायत नंबर 36874883 गुना कलेक्टर एस पी को भी लिखित शिकायत की गई कोई कार्रवाई नहीं मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन कलेक्टर के माध्यम से न्याय की मांग को लेकर हाई कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया अब झूठे केस में फंसाने की साजिश के खिलाफ याचिका की तैयारी
आरोप है कि रेंजर ने पहले शिकायत वापस लेने के लिए धमकाया भिण्ड से गुंडे बुलाकर घर से उठवा दूंगा जब बात नहीं बनी तो आरोप है कि गाड़ी में जबरन लकड़ी रखवाकर वन अपराध का झूठा केस बनाने की साजिश रची गई पीड़ित प्रमोद गुप्ता से मिली जानकारी के अनुसार पीड़ित के पास इस पूरी साजिश की मोबाइल रिकॉर्डिंग भी मौजूद है, जो अब कोर्ट में बड़ा सबूत बनेगी अगर जांच में साबित हो गया कि वन अधिकारी ने पद का दुरुपयोग कर झूठा केस बनाया, तो IPC 167, 218 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस बनता है। ऐसे अफसर को तुरंत सस्पेंड कर जेल भेजा जाना चाहिए
सबसे शर्मनाक बात – आरोप है कि रेंजर के संरक्षण में ही फतेहगढ़ के जंगल उजाड़े गए। और जब प्रमोद ने “जंगल बचाओ अभियान” चलाया, तो उल्टा उसी को जिला बदर कराने की साजिश रची गई।अब जब मामला प्रदेश के मुखिया और हाई कोर्ट तक पहुंच गया है, तो फतेहगढ़ रेंजर की कुर्सी खतरे में है।
तो क्या अब फतेहगढ़ रेंजर रवि भदौरिया पर गाज गिरेगी क्या हाई कोर्ट के दखल के बाद जंगल माफिया पर नकेल कसेगी?
इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। जैसे ही रेंजर या DFO गुना का पक्ष आता है, हम आपको सबसे पहले दिखाएंगे
आपको क्या लगता है ऐसे अफसरों पर क्या कार्रवाई होनी चाहिए? कमेंट में बताइए।
जिला गुना से व्यूरो चीफ गोलू सेन