सानंद मामलातदार कार्यालय में ‘रामराज्य’ या अंधेर नगरी? जनता के टैक्स के पैसों की हो रही बर्बादी
साणंद: साणंद मामलातदार कार्यालय एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों की गंभीर लापरवाही सामने आ रही है, जहाँ जनता के टैक्स के पैसों की सरेआम बर्बादी होती दिखाई दे रही है।
खाली कुर्सियाँ और चलते पंखे
कार्यालय में चौंकाने वाले दृश्य देखने को मिले हैं। ऑफिस की कुर्सियाँ खाली पड़ी हैं, टेबल पर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं है, फिर भी पंखे पूरी गति से चल रहे हैं। ऐसा लग रहा है मानो बिजली का कोई मोल ही न हो और बेतहाशा बिजली का व्यय हो रहा है। जब आम जनता अपने कामों के लिए कार्यालय के धक्के खा रही है, तब कर्मचारियों की इस प्रकार की ‘बेफिक्री’ कई सवाल खड़े करती है।
समय पालन का अभाव
दोपहर के 12:00 बजे जैसा मुख्य कार्य समय होने के बावजूद, कार्यालय में कोई भी अधिकारी नजर नहीं आता। सरकारी नियमों के अनुसार समय पर उपस्थित रहने के बजाय, अधिकारियों की अनुपस्थिति आम जनता के लिए भारी परेशानी का कारण बन रही है।
गंभीर सवाल
क्या सरकारी कार्यालयों में अब अनुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं बची?
क्या उच्च अधिकारी बिजली की इस बर्बादी और कर्मचारियों की अनुपस्थिति के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाएंगे?
जनता की मेहनत की कमाई से भरे जाने वाले टैक्स के पैसों पर इस तरह की लापरवाही करना कितना जायज है?
क्या साणंद मामलातदार कार्यालय में प्रशासन सिर्फ कागजों पर ही चल रहा है? अब देखना यह होगा कि इस रिपोर्ट के बाद उच्च अधिकारी नींद से जागते हैं या साणंद की जनता को इसी तरह ‘अंधेर प्रशासन’ का शिकार होना पड़ेगा।
रिपोर्टर: धरा पटेल , साणंद