गर्मी के बढ़ते प्रकोप और जल संकट के बीच इन ग्रामीणों ने बिना किसी सरकारी सहायता या प्रचार के अपनी जिम्मेदारी समझते हुए यह सेवा कार्य शुरू किया है।गांव के इन नेक दिल इंसानों ने कंटेनरों में नियमित रूप से साफ पानी भरकर सड़क किनारे, पेड़ों के नीचे और जानवरों के आने-जाने वाले रास्तों पर रखना शुरू कर दिया है। इससे न केवल प्यासे कुत्ते, गाय-बैल, बकरी और अन्य जंगली जानवर बल्कि पक्षी भी लाभान्वित हो रहे हैं।ये हैं सेवा के प्रणेता:सौहन (भुटा) सौऊ
राम खिलेरी
प्रकाश सौऊ
प्रदीप सौऊ
परवीन जांगु
सवरूप सारण
राकेश सियाक
प्रेम पटेल
सवरूप बुडियासही
इन सभी ग्रामीणों ने मिलकर यह तय किया कि गर्मी के इस मौसम में कोई भी बेजुबान प्यासा नहीं रहेगा। वे खुद अपनी जेब से खर्च उठाते हुए रोजाना कंटेनरों में पानी भरते हैं, उन्हें साफ रखते हैं और समय-समय पर जगह बदलकर ज्यादा से ज्यादा जानवरों तक पानी पहुंचाने का प्रयास करते हैं
स्थानीय लोगों के अनुसार, इन व्यक्तियों का यह कार्य गांव के लिए प्रेरणादायक है। कई अन्य ग्रामीण भी अब इस मुहिम में शामिल होने लगे हैं
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि “मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म बेजुबानों की सेवा करना है” और इन साथियों ने इसे व्यवहार में उतारकर दिखाया है।सामाजिक महत्व:
राजस्थान में गर्मी का मौसम जानवरों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होता है
जल स्रोत सूख जाते हैं और सड़कों पर प्यासे जानवर दर्द झेलते नजर आते हैं
ऐसे में काकाणी गांव के इन निस्वार्थ ग्रामीणों का प्रयास एक मिसाल बन गया है
यह कार्य न केवल पर्यावरण और पशु कल्याण की दिशा में सराहनीय है, बल्कि सामुदायिक सद्भाव और सेवा भावना को भी मजबूत करता है।यदि प्रशासन या कोई NGO इनके कार्य को बढ़ावा दे तो पूरे क्षेत्र में इस तरह की मुहिम चलाई जा सकती है।संदेश:
“पानी तो हम सबके लिए है, लेकिन बेजुबान तो सिर्फ भरोसे पर जीते हैं।”
काकाणी के इन सेवा भावी ग्रामीणों का संदेश#पशु सेवा काकाणी जोधपुर ग्रामीण सेवा भावयह खबर उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो मानते हैं कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं
काकाणी गांव के इन सपूतों को सलाम!