केशव साहू
राजनांदगांव- जनपद पंचायत डोंगरगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत नागतराई में VB-G-RAM G रोजगार गारंटी योजना के तहत कार्यों में फर्जी हाजरी भरकर शासकीय राशि के दुरुपयोग किए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि योजना में वास्तविक मजदूरों को जहां मात्र 40 से 45 दिनों का रोजगार मिल पा रहा है, वहीं कुछ जनप्रतिनिधियों एवं उनके परिजनों के नाम पर 90 से 99 दिनों तक की उपस्थिति दर्ज कर भुगतान प्राप्त करने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
ग्रामीणों के अनुसार उपसरपंच कुंभलाल वर्मा की भूमिका को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि पूर्व में उनकी पत्नी ग्राम पंचायत की सरपंच रह चुकी हैं, जिसके कारण पंचायत के कार्यों और प्रक्रियाओं का उन्हें व्यापक अनुभव है। इसी अनुभव का लाभ उठाकर कथित रूप से परिवारजनों तथा अन्य लोगों के नाम पर फर्जी हाजरी दर्ज कर लाखों रुपये के भुगतान का खेल संचालित किया जा रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि ऐसे व्यक्तियों के नाम भी मस्टर रोल में दर्ज पाए गए हैं जो नियमित रूप से कार्यस्थल पर उपस्थित नहीं होते।
मामले को और गंभीर बनाते हुए ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कुछ दिव्यांग व्यक्तियों के नाम पर भी हाजरी दर्ज की गई है, जबकि उनके द्वारा संबंधित कार्य किए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। इससे योजना की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि रोजगार गारंटी योजना के तहत जब निजी भूमि पर कार्य कराया जाता है, तब अधिकांश पंच कार्यस्थल पर दिखाई नहीं देते और पूरा कार्य मेट के भरोसे संचालित होता है। वहीं शासकीय तालाबों एवं अन्य सरकारी भूमि पर कार्य के दौरान कई जनप्रतिनिधि सुबह केवल फोटो खिंचवाने के लिए पहुंचते हैं और उसके बाद घर लौट जाते हैं। आरोप है कि निर्धारित समय तक कार्यस्थल पर मौजूद न रहने के बावजूद उनकी उपस्थिति दर्ज कर दी जाती है और भुगतान भी जारी हो जाता है।
ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि जब कई जनप्रतिनिधि कार्यस्थल पर उपस्थित ही नहीं रहते, तब उनकी नियमित हाजरी मस्टर रोल में कैसे दर्ज हो जाती है। इससे पंचायत स्तर पर निगरानी व्यवस्था और मेट की भूमिका को लेकर भी संदेह गहराता जा रहा है।
ग्राम पंचायत नागतराई में मनरेगा कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर अब जांच की मांग तेज हो गई है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जनपद पंचायत एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह गरीब मजदूरों के अधिकारों पर सीधा कुठाराघात तथा सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला होगा।