रिपोर्ट संतन दास
गरियाबंद/फिंगेश्वर
ग्राम फुलझर के ग्राम मुखिया डिहू राम साहू पर 10 अप्रैल 2026 को हुए हमले की FIR में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है।
क्या लिखा है FIR में?
FIR क्रमांक 0107, दिनांक 19.04.2026 के पेज-3 में जांच अधिकारी SI नीलूराम दीवान ने दर्ज किया है:
“10.04.2026 को रात 8 बजे ललेशरु ध्रुव, कंचन गोस्वामी, ढालसिंग ध्रुव, संतु ध्रुव एवं अन्य ने अश्लील गाली-गलौज कर जान से मारने की धमकी देते हुए हाथ-मुक्का एवं लाठी डण्डा से मारपीट कर डिहू राम साहू व उनके पुत्र परमेश्वर साहू को चोट पहुंचाई।”_जो कि प्रार्थी डीहू राम साहू के द्वारा लिखित सूचना से छेड़छाड़ है। यह की भी पीड़ित की अनुपस्थिति में FIR का गंदा खेल खेल गया है।
गवाहों ने भी की पुष्टि: रुपेश ध्रुव, ईश्वर यादव, महेश तारक, भागीरथी दीवान कैलाश गंधर्व, देवकी बाई साहू,ने घटना की पुष्टि की है।
फिर भी पुलिस ने क्या किया?
1. हत्या के प्रयास की धारा BNS 109/307 नहीं लगाई।* सिर्फ 296, 115(2), 351(3), 3(5) की हल्की धाराएं लगाईं। चोंट की गंभीरता की धाराएं भी नजर नहीं आ रहा।
2. 9 दिन बाद FIR दर्ज की।* घटना 10 अप्रैल की, FIR 19 अप्रैल को।
3. 20 में से सिर्फ 3 आरोपियों के नाम लिखे।* FIR में ललेश्वरु ध्रुव, ढालसिंग ध्रुव, संतूराम ध्रुव के नाम हैं। बाकी 17 आरोपियों के नाम गायब।
4. 45 दिन बाद भी एक गिरफ्तारी नहीं।* पुलिस वाले प्रार्थी डिहू राम साहू को गुमराह कर रहे हैं।
उल्टा पीड़ित पर कार्रवाई
फिंगेश्वर पुलिस ने पीड़ित को ही उल्टा ST/ SC केस में फंसाकर जेल भेज दिया था। ताकि प्रकरण को शून्य किया जा सके। योगेश्वर साहू जो सभा में उपस्थित नहीं था ,के विरुद्ध फर्जी कार्रवाई करना व्यापक तौर पर षडयंत्र की पुष्टि करता है।
पीड़ित की मांग:
1. FIR 0107 में BNS 109/307 जोड़ी जाए।
2. बाकी 17 आरोपियों के नाम जोड़कर तुरंत गिरफ्तारी हो।
3. SI नीलूराम दीवान व TI देशमुख को सस्पेंड किया जाए।
4. योगेश्वर साहू पर दर्ज फर्जी ST एक्ट निरस्त हो।
मानव अधिकार आयोग के जिलाध्यक्ष श्री महेंद्र गन्धर्व का कहना है कि संबंधित धाराओं पर ही आरोपियों के ऊपर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसा न करना मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता।
थाना फिंगेश्वर से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, थाना प्रभारी देशमुख ने कहां जज साहब अभी छुट्टी पर हैं जैसे ही आएंगे आरोपियों को न्यायालय में पेश करेंगे।
इनसे यह भी स्पष्ट होता है कि पुलिस आरोपियों से मिली हुई है। पीड़ित को 3 पुलिस अधिकारी पर शक है सूचना के अधिकार के तहत आरोपियों से बातचीत का ऑडियो रिकॉर्ड मागेंगे। पीड़ित परिवार ने न्याय के लिए वैधानिक ढंग से लंबी लड़ाई लड़ने की बात कही।