बरेली
शहर की अक्सर कॉलोनी और उसके आसपास के क्षेत्रों में अवैध चिकन वधशालाओं (बूचड़खानों) से निकलने वाले अवशेषों ने स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। इन अवशेषों को खुले में फेंकने के कारण यहाँ आवारा कुत्तों का जमावड़ा बढ़ गया है, जो अब राहगीरों और बच्चों के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं।स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इलाके में संचालित चिकन की अधिकांश दुकानों पर किसी भी प्रकार का वैध प्रमाण-पत्र या लाइसेंस मौजूद नहीं है। मांस के अवशेषों का सही निस्तारण करने के बजाय, दुकानदार इन्हें खुले में फेंक देते हैं। इन अवशेषों को खाने के लिए जुट रहे कुत्तों के झुंड अब हिंसक हो चुके हैं।अक्सर कॉलोनी के निवासियों ने बताया कि स्थिति इतनी भयावह है कि सुबह-शाम निकलना मुश्किल हो गया है।आवारा कुत्ते अब तक कई बच्चों को काटने का प्रयास कर चुके हैं, जिससे अभिभावकों में भारी दहशत का माहौल है।राहगीरों, विशेषकर बुजुर्गों और महिलाओं को इन कुत्तों के कारण चोटिल होने का डर बना रहता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) से शिकायत की, लेकिन विभागीय अधिकारी केवल ‘सर्वे’ के नाम पर खानापूर्ति कर रहे हैं। विभाग की इस लापरवाही के कारण अवैध रूप से संचालित इन दुकानों के संचालकों के हौसले बुलंद हैं और किसी भी दुकान पर मानक के अनुरूप कोई बोर्ड या प्रमाण-पत्र प्रदर्शित नहीं किया जा रहा है।बिना लाइसेंस चल रही सभी चिकन दुकानों को तत्काल बंद किया जाए।मांस अवशेषों के निस्तारण के लिए सख्त नियम लागू हों और उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगे।निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जन समस्या समाधान के प्रति ज़िला अधिकारी को ज्ञापन देने के सहित आन्दोल का भी आग़ाज़ कर सकते हैं।
रिपोर्ट:शुऐब खान ब्योरो चीफ बरेली मण्डल