डिबाई के तहसील क्षेत्र में करोड़ों रुपये की कृषि भूमि के सौदे में कथित धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। थाना डिबाई पुलिस ने छह नामजद समेत एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि जमीन खरीद-बिक्री के नाम पर खरीदार पक्ष से करीब 1 करोड़ 57 लाख रुपये की धनराशि हड़प ली गई।
पुलिस के अनुसार, गौतमबुद्धनगर जनपद के जेवर निवासी विशनस्वरूप शर्मा और उनके परिजन कृषि भूमि खरीदना चाहते थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात कुछ लोगों से हुई, जिन्होंने डिबाई क्षेत्र में करीब 52 बीघा कृषि भूमि बिक्री के लिए उपलब्ध होने की जानकारी दी। आरोपितों ने ग्राम डिबाई देहात स्थित लगभग 3.250 हेक्टेयर भूमि दिखाई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच करीब 4 करोड़ 82 लाख रुपये में सौदा तय हुआ।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि सौदा तय होने पर 12 लाख रुपये नकद बयाने के रूप में दिए गए। इसके बाद विभिन्न तिथियों में आरटीजीएस और नेट बैंकिंग के माध्यम से अलग-अलग खातों में धनराशि स्थानांतरित की गई। आरोप है कि कुल मिलाकर लगभग 1 करोड़ 57 लाख रुपये आरोपितों तक पहुंच गए। निर्धारित तिथि पर भूमि के बैनामे भी करा दिए गए और शेष भुगतान के लिए चेक दिए गए।
मामले में उस समय नया मोड़ आ गया जब एक व्यक्ति ने स्वयं को उक्त भूमि का वास्तविक मालिक बताते हुए खरीदार पक्ष के अधिवक्ता से संपर्क किया। शिकायतकर्ता के अनुसार जांच में पता चला कि जिन दस्तावेजों के आधार पर भूमि का बैनामा कराया गया था, वे फर्जी या संदिग्ध हो सकते हैं। आरोप है कि सुनियोजित तरीके से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर भूमि का सौदा कराया गया और बड़ी धनराशि की ठगी की गई।
थाना डिबाई पुलिस ने शिकायत के आधार पर बनी सिंह, रामनरेश, देवराज, बन्टी, ललित कुमार तथा एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। मामले की जांच उपनिरीक्षक राहुल कुमार को सौंपी गई है।
क्षेत्राधिकारी ने कही यह बात
क्षेत्राधिकारी डिबाई मधुप कुमार सिंह ने बताया कि भूमि खरीद-बिक्री से संबंधित धोखाधड़ी की
शिकायत मिलने पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। भूमि के स्वामित्व, प्रस्तुत दस्तावेजों की वैधता तथा धनराशि के लेन-देन की गहन जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
संपत्ति खरीदने वालों के लिए सबक
विशेषज्ञों का कहना है कि भूमि खरीदने से पहले राजस्व अभिलेख, खतौनी, खसरा, मालिकाना हक, पूर्व बैनामों की श्रृंखला और न्यायालय में लंबित वादों की जांच अवश्य करानी चाहिए। संबंधित विभागों से दस्तावेजों का सत्यापन भी जरूरी है। थोड़ी सी लापरवाही जीवनभर की कमाई को जोखिम में डाल सकती है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले में धनराशि के प्रवाह और दस्तावेजों की सत्यता की जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
संवाददाता अतुल कुमार