किशोर कुमार छत्तीसगढ़ स्टेट रिपोर्टर इंडियन टीवी न्यूज नेशनल
बस्तर।
आधुनिकता की तेज रफ्तार के बीच बस्तर के जंगलों से एक सुखद तस्वीर सामने आई है। गगनपल्ली गांव में नई पीढ़ी अपनी दादी-नानी और बुजुर्गों से पारंपरिक लोकज्ञान, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक विरासत सीख रही है।
गांव में बच्चे और युवा बुजुर्गों के साथ बैठकर लोकगीत, लोककथाएं, पारंपरिक खेती के तरीके, औषधीय पौधों की पहचान और जंगल से जुड़े जीवन कौशल की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।
इस पहल का उद्देश्य तेजी से लुप्त होती आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।
ग्रामीणों का मानना है कि यह ज्ञान केवल संस्कृति का हिस्सा नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की अनमोल विरासत भी है। दादी-नानी की कहानियों और अनुभवों के माध्यम से बच्चों में अपनी जड़ों से जुड़ाव और स्थानीय परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित हो रही है।
गगनपल्ली की यह पहल अब आसपास के गांवों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। स्थानीय लोग उम्मीद जता रहे हैं कि इस तरह के प्रयासों से बस्तर की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक ज्ञान और आदिवासी पहचान आने वाले वर्षों तक सुरक्षित रह सकेगी।