शहजाद आलम जिला संवाददाता
सिद्धार्थनगर।
सिद्धार्थनगर जिले के विकास खंड बांसी के ग्राम चेतिया स्थित सहकारी समिति (बी-पैक्स) के लिए लगभग 45.46 लाख रुपये की लागत से निर्मित 100 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि गोदाम के निर्माण में भारी अनियमितता और घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया, जिसके कारण हैंडओवर के मात्र तीन माह के भीतर ही भवन का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया।
जानकारी के अनुसार, गोदाम का निर्माण किसानों को उर्वरक भंडारण एवं वितरण की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कराया गया था। गोदाम परिसर में लगे सूचना पट्ट के अनुसार निर्माण कार्य की लागत 45.46 लाख रुपये रही, जबकि कार्य पूर्ण होने की तिथि 27 दिसंबर 2025 तथा विभाग को हस्तांतरण की तिथि 18 मार्च 2026 अंकित है।
ग्रामीणों का कहना है कि भवन के कार्यालय कक्ष का कंक्रीट स्लैब उद्घाटन से पहले ही टूटकर गिर गया। इसके अलावा कई स्थानों पर दीवारों का प्लास्टर उखड़ रहा है तथा खिड़कियों और दरवाजों में लगाए गए कांच भी टूटकर बिखर गए हैं। इतनी कम अवधि में भवन की यह स्थिति निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही है।
स्थानीय किसानों के अनुसार इस गोदाम से चेतिया, बड़हरघाट, रेहरा समेत लगभग 12 गांवों के हजारों किसानों को यूरिया एवं अन्य उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित होनी थी। लेकिन भवन के क्षतिग्रस्त होने के कारण इसका समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है। किसानों का आरोप है कि उन्हें समिति से मिलने वाली सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है और कई बार बिचौलियों से अधिक कीमत पर उर्वरक खरीदने को मजबूर होना पड़ता है।
मामले को लेकर क्षेत्रीय किसानों में भारी नाराजगी है। किसानों ने जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर को शिकायत पत्र देकर पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि गोदाम की जांच किसी स्वतंत्र एवं प्रतिष्ठित तकनीकी संस्था, जैसे IIT गोरखपुर, से कराई जानी चाहिए ताकि निर्माण में हुई अनियमितताओं का पता चल सके।
किसानों ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक संबंधित ठेकेदार का भुगतान रोका जाए तथा दोषी पाए जाने पर उसे ब्लैकलिस्ट किया जाए। साथ ही निर्माण कार्य की निगरानी एवं हैंडओवर प्रक्रिया से जुड़े अवर अभियंता और सहायक अभियंता की भूमिका की भी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। किसानों ने दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने तथा ठेकेदार के खर्च पर मानक के अनुरूप पुनर्निर्माण कराने की मांग उठाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह धन जनता और किसानों के हित के लिए खर्च किया गया था, लेकिन भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण सरकारी धन की बर्बादी हुई है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।
अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर करोड़ों की योजनाओं की तरह इस मामले में भी जांच होगी या फिर किसानों की शिकायतें फाइलों में ही दबकर रह जाएंगी।