आंवला बरेली
इतिहास गवाह है कि उत्तर पांचाल की राजधानी ‘अहिच्छत्र’ की वैभवशाली धरती ने कभी किसी को प्यासा नहीं रखा। लेकिन आज उसी ऐतिहासिक सांस्कृतिक क्षेत्र की धरोहर, आंवला की लीलौर झील खुद पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रही है। महाभारत और कुषाण काल के गौरवशाली अवशेषों को अपने सीने में समेटे यह ऐतिहासिक झील इस समय भीषण गर्मी और प्रशासनिक दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। सूर्यदेव के तीखे तेवरों ने झील के पानी को सोख लिया है। जिससे इसका जलस्तर खतरनाक रूप से नीचे गिर गया है।
सरकारी दावे हवा-हवाई ग्राउंड जीरो पर पानी गायब
दिलचस्प और तीखी बात यह है कि कागजों पर इस झील को ‘सदाबहार’ बनाए रखने के लिए यहां चार-चार सरकारी ट्यूबवेल लगाए गए हैं। लेकिन जब भीषण गर्मी में इन ट्यूबवेलों को सबसे ज्यादा दम दिखाना था। तब ये सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। भारी-भरकम बजट से लगे ये ट्यूबवेल झील की प्यास बुझाने में पूरी तरह नाकाम हैं। पानी की आवक कम और वाष्पीकरण ज्यादा होने से झील का बड़ा हिस्सा अब सूखी जमीन और दरारों में तब्दील होने लगा है।
बड़ा सवाल जब चार ट्यूबवेल पहले से मौजूद हैं, तो झील का यह हाल क्यों है। क्या ये ट्यूबवेल सिर्फ कागजी विकास की शोभा बढ़ा रहे हैं या इन्हें पर्याप्त बिजली और मेंटेनेंस ही नसीब नहीं हो रहा।
अहिच्छत्र की विरासत पर संकट
रामनगर के पास स्थित अहिच्छत्र के ऐतिहासिक टीलों से महज 15-20 किलोमीटर दूर स्थित लीलौर झील सिर्फ पानी का गड्ढा नहीं है। यह इस पूरे इलाके की लाइफलाइन और प्राचीन संस्कृति का प्रतीक है। कुषाण काल के इतिहास को जीवंत रखने वाली इस झील का सूखना यहां के इकोसिस्टम और भूजल स्तर के लिए एक बड़ा अलार्म है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है।कि जो धरोहर पर्यटकों और इतिहासप्रेमियों के आकर्षण का केंद्र होनी चाहिए थी। वह आज अफसरों की लापरवाही के कारण दुर्दशा का शिकार है।
बेजुबान पक्षी और जलीय जीव बेहाल
झील का पानी कम होने से सबसे बड़ा संकट यहां के जलीय जीवों और प्रवासी पक्षियों पर मंडरा रहा है। गर्मी के इस मौसम में पानी के सिकुड़ते दायरे ने मछलियों और अन्य जीवों का दम घोंटना शुरू कर दिया है।
अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन इस ‘महाभारत कालीन’ धरोहर को बचाने के लिए इन चार ट्यूबवेलों को मुस्तैद करता है, या फिर इतिहास की इस अनमोल कड़ी को ऐसे ही सूखने के लिए छोड़ दिया जाएगा। जनता जवाब मांग रही है।
प्रवीन कुमार सक्सेना तहसील रिपोर्टर आंवला बरेली