ब्यूरो चीफ महासमुदं छतीसगढ
संतन दास मानिकपुरी
गरियाबंद 18.06.2026 सरकार तरह तरह की मुहिम चला रही ताकि हर गांव का बच्चा नशा से मुक्त हो ताकि भविष्य की पीढ़ी इनके माध्यम से ही गढ़ा जा सके। देश की 60 फीसदी जनसंख्या कार्यशील है और युवा ही नशे की भंवर में फंस जाए तो वह घर ही क्या गांव भी सुरक्षित नहीं रह सकता। राष्ट्रपिता महात्मा कहते थे यदि देश का विकास करना है तो सर्वप्रथम गांव का विकास सर्वोपरि है। सरकार ने भी इस बात को भलीभांति सोचा होगा जिसके फलस्वरूप शैक्षणिक केंद्रों के 100 मीटर दूरी तक किसी भी प्रकार का नशा पदार्थ विक्रय लगाने पर प्रतिबंध लगाया । प्रत्येक स्कूल में नशामुक्त शाला परिसर का लोगो इस बात की गवाही देता है मगर क्या यह सिर्फ दिखावे का प्रोग्राम है या फिर शैक्षणिक कार्यालयों के जिम्मेदार सरकार के महती गाइडलाइन को जमीनी स्तर तक निभा पा रहे है। पड़ताल में सामने आ रही है यह एक ढकोसला है लगातार मादक पदार्थों का विक्रय शालेय परिसर के आसपास ही किया जा रहे है जिससे आए दिन बच्चे गुटखा, पान मसाला, सिगरेट आदि का आदी होते जा रहे है सिर्फ स्कूली बच्चे ही नहीं जिम्मेदार शिक्षकों को भी इस प्रकार नशा में लिप्त देखा जा सकता है। जरूरी है शिक्षकों को शिक्षा के साथ साथ नैतिक शिक्षा भी और संस्कार प्रदान करना है अतएव सरकार ने वर्तमान में समय सारणी में व्यापक परिवर्तन किया है।
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