राजगढ़ ब्यूरो चीफ संतोष गोस्वामी
सरकारें स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत क्या है? इस वक्त हम खड़े हैं राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ के महाराजा मेहताब सिविल अस्पताल के ठीक बाहर। नियम कहते हैं कि सुबह 9:00 बजे डॉक्टरों और स्टाफ को अपनी ड्यूटी पर तैनात होना चाहिए। लेकिन जरा घड़ी की सुइयों को देखिए… सुबह के 10 बज रहे हैं, लेकिन साहब… अस्पताल से डॉक्टर और नर्स दोनों ही नदारद हैं!”
यह लापरवाही किसी एक दिन की नहीं, बल्कि यहां का रोज का ढर्रा बन चुकी है। नरसिंहगढ़ शहर के साथ-साथ आसपास के दर्जनों गांवों से गरीब ग्रामीण इस उम्मीद में सुबह-सुबह अस्पताल पहुंचते हैं कि उन्हें समय पर इलाज मिलेगा। कोई मजदूरी छोड़कर आता है, तो कोई अपनी आखिरी जमापूंजी लगाकर बस का किराया भरकर यहां पहुंचता है। लेकिन अस्पताल आकर उन्हें मिलती है तो सिर्फ खाली कुर्सियां और अंतहीन इंतजार! बीमार मरीज बेहाल हैं, लेकिन साहब लोग अपनी मर्जी के मालिक हैं।””हम सुबह 8:30 बजे से आकर बैठे हैं। पर्ची कटवा ली है, लेकिन डॉक्टर साहब का कमरा बंद है। पूछने पर बोलते हैं कि साहब आ रहे हैं।10, बजने को आ गए, हमारी तबीयत और खराब हो रही है। कोई सुनने वाला नहीं है।”
मरीजों की इस बेबसी का जिम्मेदार आखिर कौन है? क्या इन डॉक्टरों और नर्सों को अपनी जिम्मेदारी का कतई अहसास नहीं है? सबसे बड़ा सवाल तो राजगढ़ जिला चिकित्सा अधिकारी (CMHO) पर खड़ा होता है। क्या जिला स्वास्थ्य विभाग इस घोर लापरवाही का संज्ञान लेगा? या फिर नरसिंहगढ़ के इस सिविल अस्पताल में गरीब जनता यूं ही राम भरोसे छोड़ दी जाएगी? क्या लापरवाही करने वाले इन डॉक्टरों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी, या हर बार की तरह मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?”
जनता टैक्स देती है ताकि उन्हें बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें, न कि डॉक्टरों के इंतजार में दम तोड़ने के लिए। अब देखना यह है कि इस खबर के बाद राजगढ़ प्रशासन नींद से जागता है या फिर यह गौर लापरवाही यूं ही बदस्तूर जारी रहेगी।