ब्यूरो चीफ धार मध्यप्रदेश से संदीप श्रीवास्तव की रिपोर्ट
स्कूल वाहनों की जांच में खुली सुरक्षा व्यवस्था की पोल
60 में से 48 वाहन नियमों पर खरे नहीं उतरे,
यातायात पुलिस ने काटे 32 हजार रुपए के चालान
बदनावर। बच्चों की सुरक्षा को लेकर निजी स्कूल कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा गुरूवार को यातायात पुलिस की कार्रवाई से लगाया जा सकता है। विशेष अभियान के तहत नगर और आसपास के निजी स्कूलों के 60 से अधिक वाहनों की जांच की गई, जिनमें से 48 यानि 80 प्रतिशत वाहन सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरे। पुलिस ने नियमों के उल्लंघन पर 32 हजार रुपए के चालान बनाए। चौंकाने वाली बात यह है कि यह कार्रवाई केवल कुछ स्कूलों तक सीमित रही है। ऐसे में बदनावर तहसील के 84 निजी स्कूलों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित स्कूल वाहनों की जांच होने पर स्थिति और भी गंभीर निकलने की आशंका है।
दो दिनों तक चले इस अभियान के दौरान यातायात पुलिस ने स्कूल बसों और वैनों में सुरक्षा मानकों का निरीक्षण किया। जांच में कई वाहनों में फर्स्ट एड बॉक्स, मेडिकल किट और अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) नहीं मिले। कई चालक निर्धारित वर्दी में नहीं थे, जबकि कुछ वाहनों में बच्चों की सुरक्षा के लिए आवश्यक परिचालक (अटेंडेंट) भी मौजूद नहीं मिला। यानि जिन वाहनों में रोज मासूम बच्चे सफर कर रहे हैं, उनमें आपात स्थिति से निपटने की बुनियादी तैयारी तक नहीं थी।
जांच के दौरान एक वाहन बिना बीमा के संचालित पाया गया, जबकि एक अन्य वाहन में परमीट सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज अधूरे मिले। दोनों मामलों में 5-5 हजार रुपए के चालान किए गए। हालांकि अधिकांश वाहनों में पैनिक बटन और जीपीएस सिस्टम लगे हुए पाए गए, जो सुरक्षा मानकों के अनुरूप थे। कार्रवाई के दौरान रक्षित निरीक्षक नितेश राठौर, आरक्षक उत्तम भदौरिया, जितेंद्र, धरमवीर, सिंटू शर्मा तथा सैनिक अरुण सहित यातायात पुलिस का अमला मौजूद रहा।
औचक निरीक्षण जारी रहेंगे
रक्षित निरीक्षक नितेश राठौर ने बताया कि यह अभियान पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर चलाया गया है। स्कूल वाहनों में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए आगे भी औचक निरीक्षण किए जाएंगे और नियमों की अनदेखी करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
पालकों का कहना है कि स्कूल वाहन केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि सैकड़ों बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी हैं। ऐसे में प्राथमिक सुरक्षा उपकरणों का अभाव और नियमों की अनदेखी गंभीर चिंता का विषय है। कार्रवाई केवल चालान तक सीमित न रहकर सभी निजी स्कूलों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित वाहनों के व्यापक सुरक्षा ऑडिट तक पहुंचनी चाहिए, ताकि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता न हो।
संलग्न चित्र -यातायात पुलिस रक्षित निरीक्षक स्कूल वाहनों की चैकिंग करते हुए।