रिपोर्ट नवीन रांकावत
जोधपुर। प्रदेश में कन्या भ्रूण हत्या पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत जोधपुर में राज्य एवं जिला पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) टीम ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण के एक नेटवर्क का पर्दाफाश किया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सुनियोजित डिकॉय ऑपरेशन के दौरान एक निजी नर्सिंगकर्मी को गर्भस्थ शिशु का लिंग बताने के आरोप में रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। आरोपी के कब्जे से पोर्टेबल मोबाइल अल्ट्रासाउंड मशीन तथा डिकॉय ऑपरेशन के लिए दिए गए 50 हजार रुपये बरामद किए गए। आरोपी को पीसीपीएनडीटी न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने के आदेश दिए गए हैं। अब जांच एजेंसियां उसके पूरे नेटवर्क और अवैध उपकरण के स्रोत की पड़ताल में जुट गई हैं।
यह कार्रवाई चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर, प्रमुख शासन सचिव (स्वास्थ्य) गायत्री राठौड़, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम, पीसीपीएनडीटी प्रोजेक्ट निदेशक सोनल मीणा, अतिरिक्त निदेशक अंजली अजीत जोरवाल तथा जिला कलक्टर आलोक रंजन के निर्देशन एवं निकट सुपरविजन में अंजाम दी गई।
मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी निजी नर्सिंगकर्मी ओमप्रकाश चौधरी पिछले काफी समय से पीसीपीएनडीटी टीम की निगरानी में था। उसके खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि वह मोटी रकम लेकर गर्भस्थ शिशु का लिंग बताने का अवैध कारोबार कर रहा है। कई दिनों तक गोपनीय निगरानी और सूचनाओं के सत्यापन के बाद कार्रवाई की योजना बनाई गई।
*प्रतापगढ़ से बुलाई गर्भवती महिला, पूरी गोपनीयता से रचा गया डिकॉय ऑपरेशन*
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि आरोपी जोधपुर के बनाड़ क्षेत्र में सक्रिय था। उसके खिलाफ पहले भी शिकायतें मिली थीं, लेकिन पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिल पाए थे। इस बार पुख्ता सूचना मिलने के बाद जिला कलक्टर की अनुमति से विशेष डिकॉय ऑपरेशन तैयार किया गया।
आरोपी को किसी प्रकार का संदेह न हो, इसलिए प्रतापगढ़ से एक गर्भवती महिला को बुलाया गया। पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार महिला को आरोपी के पास भेजा गया। आरोपी ने कथित रूप से भ्रूण का लिंग बताने के लिए 50 हजार रुपये की मांग की। जैसे ही उसने जांच शुरू की और लिंग संबंधी जानकारी देने की प्रक्रिया अपनाई, पहले से तैनात पीसीपीएनडीटी टीम ने मौके पर दबिश देकर उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।
तलाशी के दौरान आरोपी के पास से पोर्टेबल मोबाइल अल्ट्रासाउंड मशीन, मोबाइल फोन तथा डिकॉय ऑपरेशन के लिए दिए गए 50 हजार रुपये बरामद हुए। इसके बाद पीबीआई थाना पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर मामला दर्ज किया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी अत्याधुनिक हैंडहेल्ड पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड प्रोब का इस्तेमाल कर रहा था। यह उपकरण तार के माध्यम से सीधे मोबाइल फोन से जुड़ जाता है। मोबाइल में इंस्टॉल विशेष एप्लीकेशन स्क्रीन का कार्य करती है और सामान्य सोनोग्राफी मशीन की तरह भ्रूण की तस्वीर दिखाई देती है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस प्रकार के पोर्टेबल उपकरणों का उपयोग विदेशों में अधिक होता है, लेकिन भारत में बिना पंजीकरण और विशेष रूप से भ्रूण लिंग परीक्षण के लिए इनका इस्तेमाल पूरी तरह अवैध है।
कार्रवाई के बाद पीसीपीएनडीटी सेल अब यह पता लगाने में जुट गई है कि आरोपी कब से इस अवैध कारोबार में शामिल था। जांच में यह भी देखा जाएगा कि उसके साथ कौन-कौन लोग जुड़े थे, किन-किन क्षेत्रों में यह गतिविधि संचालित की जा रही थी तथा उसके पास बरामद पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन कहां से लाई गई।
अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति, चिकित्सक या संस्थान की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी पीसीपीएनडीटी अधिनियम सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।
जिला पीसीपीएनडीटी समन्वयक सरला दाधीच ने बताया कि भारत में गर्भस्थ शिशु का लिंग परीक्षण करना, करवाना अथवा इसके लिए किसी प्रकार की सहायता देना पीसीपीएनडीटी (Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques) Act, 1994 के तहत पूर्णतः प्रतिबंधित एवं दंडनीय अपराध है। प्रत्येक सोनोग्राफी मशीन का पंजीकरण अनिवार्य है और उसकी जीपीएस आधारित निगरानी की जाती है ताकि मशीनों का दुरुपयोग रोका जा सके।
इस सफल डिकॉय ऑपरेशन में जयपुर पीबीआई थाना की निरीक्षक प्रीति चैची एवं संतोष शर्मा, सब-इंस्पेक्टर द्वारका प्रसाद, जोधपुर जिला पीसीपीएनडीटी समन्वयक सरला दाधीच, पाली जिले के महेश कुमार तथा पीबीआई थाना के कांस्टेबल नरेंद्र कुमार, शानु चौधरी और मुकेश सहित राज्य एवं जिला स्तर की पीसीपीएनडीटी टीम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गिरफ्तार आरोपी निजी नर्सिंगकर्मी ओमप्रकाश चौधरी को शुक्रवार को पीसीपीएनडीटी न्यायालय में पेश किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशिष्ट अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (पीसीपीएनडीटी एक्ट केसेज) जोधपुर महानगर लोचन खिड़ीयां देवल द्वारा आरोपी ओमाराम को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने के आदेश दिए गए आरोपी को पुलिस और पीसीपीएनडीटी सेल अब उससे पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क और इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।