सतना से प्रतिदिन आते हैं पुष्प और बेलपत्र, श्रद्धालुओं के सहयोग से सजता है चौमुखनाथ धाम
1500 वर्ष पुरानी आस्था में भक्ति का महाउत्सव, संध्या आरती से पहले उमड़ते हैं श्रद्धालु
पन्ना जिले के विश्वविख्यात एवं लगभग 1500 वर्ष प्राचीन चौमुखनाथ महादेव मंदिर में श्रावण मास के दौरान प्रतिदिन संध्या आरती से पूर्व भगवान चौमुखनाथ का दिव्य एवं भव्य श्रृंगार किया जाता है। मंदिर के पुजारी एवं स्थानीय श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और वैदिक परंपरा के अनुसार भगवान का विशेष श्रृंगार पुष्पों, बेलपत्र, मालाओं और प्राकृतिक सजावट से करते हैं। आरती से पहले भगवान का यह मनोहारी स्वरूप श्रद्धालुओं को उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में होने वाले दिव्य श्रृंगार की अनुभूति कराता है।
इस श्रृंगार की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रतिदिन भगवान के श्रृंगार के लिए ताजे पुष्प और बेलपत्र सतना से विशेष रूप से मंगाए जाते हैं। इन पुष्पों एवं पूजन सामग्री का संपूर्ण व्यय श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धाभाव से वहन किया जाता है। भक्तों की इसी निस्वार्थ सेवा और समर्पण से प्रतिदिन चौमुखनाथ महादेव का भव्य एवं आकर्षक श्रृंगार संभव हो पाता है।
श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र काल माना जाता है। मान्यता है कि इस माह में जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण और सच्चे मन से की गई पूजा भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होती है तथा भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करती है। यही कारण है कि श्रावण में चौमुखनाथ धाम में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और संध्या आरती से पूर्व होने वाले इस दिव्य श्रृंगार के साक्षी बनने पहुँच रहे हैं।
जैसे ही संध्या आरती प्रारंभ होती है, शंखनाद, घंटियों की गूंज, दीपों की जगमगाहट और “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो उठता है। यह अलौकिक दृश्य श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति, भक्ति और महाकाल की दिव्यता का अद्भुत अनुभव कराता है।
चौमुखनाथ महादेव का संध्या आरती पूर्व होने वाला यह दिव्य श्रृंगार केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के समर्पण, सनातन संस्कृति और शिवभक्ति का जीवंत प्रतीक है, जो हर दिन हजारों श्रद्धालुओं को शिवत्व की अनुभूति कराता है।
पन्ना के सलेहा से ब्योरा रिपोर्ट कमला कान्त मिश्रा