संजय सैनी
एक विचार, वर्षों की सेवा
कांवड़ सेवा समिति रजि. के अध्यक्ष संजय सैनी से विशेष बातचीत
. सहारनपुर सैनी पंचायती मंदिर पुराना चिलकाना बस अड्डा में सिवीर लगाया जाने वाला कांवड़ सेवा शिविर आज श्रद्धा, सेवा और समर्पण की एक मिसाल बन चुका है। पिछले वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहे इस शिविर के पीछे एक छोटा-सा विचार और भगवान भोलेनाथ के प्रति अटूट आस्था की बड़ी कहानी है।
‘ विशेष बातचीत में समिति के अध्यक्ष संजय सैनी ने शिविर की शुरुआत से जुड़ी स्मृतियां साझा करते हुए बताया कि उन्होंने लगभग वर्षों तक हरिद्वार से गंगाजल लाकर भगवान शिव को अर्पित किया। कांवड़ यात्रा के दौरान सेवा और श्रद्धा का जो अनुभव उन्हें मिला, उसी ने आगे चलकर कांवड़ियों की सेवा के लिए प्रेरित किया।
संजय सैनी बताते हैं कि प्रारंभ में इसी मंदिर में केवल पांच दस कावडिये आस पास के कवडिये आते थे कांवड़ियों के लिए पानी खाने की व्यवस्था की जाती थी। इसी दौरान उनके मन में विचार आया कि क्यों न यहां पर कावड़ सेवा शिविर लगाया जाए । विचार सभी को पसंद आया और धीरे-धीरे इसी विचार ने सेवा के एक बड़े संकल्प का रूप ले लिया।
इसके बाद समिति का गठन हुआ और संजय सैनी को अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। देखते ही देखते सेवा का यह छोटा प्रयास आज वर्षों की निरंतर यात्रा पूरी कर चुका है।
सेवा ही संकल्प, सेवा ही साधना
अध्यक्ष व समाजसेवी संजय सैनी कहते हैं कि आज यह सब भगवान शिव की कृपा से संभव हो रहा है। शिविर में आने वाले कांवड़ियों की सेवा पूरी टीम निस्वार्थ भाव से करती है। भोजन, विश्राम, जल और अन्य आवश्यक सुविधाओं के माध्यम से शिवभक्तों की सेवा को समिति अपना सौभाग्य मानती है।
इस सेवा कार्य में उप प्रधान रूपेश सैनी कोषाध्यक्ष सुनील सैनी व विकास सैनी महामंत्री सहित समिति के अनेक सदस्य निरंतर अपना सहयोग दे रहे हैं।
संजय सैनी के शब्दों में—
“हम सेवा नहीं कर रहे, बल्कि भोलेनाथ के भक्तों की सेवा के माध्यम से स्वयं को सौभाग्यशाली मान रहे हैं। जब एक थका हुआ कांवड़िया शिविर में पहुंचकर राहत महसूस करता है और उसके चेहरे पर संतोष दिखाई देता है, वही हमारे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।”
वर्षों की यह सेवा बताती है कि बड़े कार्य हमेशा बड़े साधनों से नहीं, बल्कि एक छोटे से विचार, सच्ची नीयत और निरंतर समर्पण से शुरू होते हैं।
रिपोर्ट : रमेश सैनी सहारनपुर