बलिया। रसड़ा विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक उमाशंकर सिंह की अंतिम यात्रा शुक्रवार को उनके पैतृक गांव खनवर से निकली तो पूरा इलाका गम और भावनाओं में डूब गया। अंतिम यात्रा में उमड़े जनसैलाब ने यह बता दिया कि उमाशंकर सिंह ने अपने सार्वजनिक जीवन में लोगों के बीच कितनी गहरी जगह बनाई थी। रास्ते भर लोगों की भीड़ अपने नेता की अंतिम झलक पाने के लिए उमड़ती रही। कई स्थानों पर महिलाएं फूट-फूटकर रो पड़ीं और अपने प्रिय विधायक को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।
पैतृक गांव खनवर से शुरू हुई अंतिम यात्रा करीब 30 किलोमीटर का सफर तय कर शिवरामपुर घाट पहुंची। भीड़ इतनी अधिक थी कि इस दूरी को तय करने में कई घंटे लग गए। रास्ते में जगह-जगह लोगों ने पुष्प अर्पित कर दिवंगत विधायक को अंतिम विदाई दी। अंतिम यात्रा जिस मार्ग से गुजरी, वहां बड़ी संख्या में लोग सड़क के दोनों ओर खड़े नजर आए।
उमाशंकर सिंह ने अपने सार्वजनिक जीवन में कभी मंचों से अपनी पहचान का ढिंढोरा नहीं पीटा। उन्होंने स्वयं को किसी विशेष उपाधि से संबोधित करने की कोशिश नहीं की, लेकिन उनके आचरण, सामाजिक व्यवहार और लोगों से जुड़ाव ने उन्हें अलग पहचान दी। उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने परंपराओं और सामाजिक जिम्मेदारियों को हमेशा महत्व दिया और अपने क्षेत्र के लोगों के सुख-दुख में खड़े रहे।
लोगों की भीड़ को देखकर यह सवाल भी उठने लगा कि आखिर किसी जनप्रतिनिधि के प्रति जनता का ऐसा भावनात्मक जुड़ाव कैसे बना। अंतिम यात्रा में शामिल हजारों लोगों की मौजूदगी इसका जवाब देती नजर आई। समर्थकों के लिए उमाशंकर सिंह केवल विधायक नहीं, बल्कि क्षेत्र की आवाज और अपने लोगों के बीच खड़े रहने वाला चेहरा थे।
शिवरामपुर घाट पर भी भारी संख्या में लोग उमड़े। घाट पर हजारों लोगों की मौजूदगी के बीच उमाशंकर सिंह को अंतिम विदाई दी गई। जब अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई तो माहौल बेहद भावुक हो गया। लोगों की आंखें नम थीं और हर कोई अपने प्रिय नेता को अंतिम प्रणाम करता नजर आया। अंततः विधायक उमाशंकर सिंह पंचतत्व में विलीन हो गए।
संवाददाता: किशन जायसवाल, बलिया