किशोर कुमार छत्तीसगढ़ स्टेट रिपोर्टर इंडियन टीवी न्यूज नेशनल
बिलासपुर। इंस्टाग्राम रील और उस पर आने वाले कथित अभद्र कमेंट्स को लेकर पति-पत्नी के बीच शुरू हुआ विवाद आखिरकार हाई कोर्ट पहुंच गया। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए पति और उसके परिवार के खिलाफ दर्ज दहेज प्रताड़ना की FIR को निरस्त कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने रायगढ़ निवासी पति और उसके परिवार के खिलाफ पचपेड़ी थाने में दर्ज मामले को रद्द करते हुए कहा कि यदि ससुराल पक्ष के सदस्यों के खिलाफ उनकी विशिष्ट भूमिका से जुड़े ठोस आरोप नहीं हैं, तो पूरे परिवार को आपराधिक मामले में घसीटना कानून की प्रक्रिया के दुरुपयोग की श्रेणी में आ सकता है।
पांच महीने बाद मायके चली गई थी पत्नी
मामले के अनुसार रायगढ़ निवासी आकाश तिवारी का विवाह 22 मई 2025 को शिवानी तिवारी के साथ हुआ था। शादी के करीब पांच महीने बाद पत्नी मायके चली गई। इसके बाद उसने ससुराल पक्ष के खिलाफ दहेज प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ससुराल पक्ष की ओर से 8 से 10 लाख रुपये नकद और नेक्सॉन कार की मांग की जा रही थी।
रील और कमेंट्स को बताया गया विवाद की वजह
ससुराल पक्ष की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि वैवाहिक विवाद की शुरुआत पत्नी द्वारा इंस्टाग्राम पर रील बनाने और उन रील्स पर आने वाले कथित अभद्र एवं आपत्तिजनक कमेंट्स को लेकर हुई थी। इसी मुद्दे को लेकर परिवार में विवाद और मनमुटाव बढ़ा।
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने आरोपों और उपलब्ध सामग्री का परीक्षण किया। कोर्ट ने पाया कि परिवार के सभी सदस्यों के खिलाफ पर्याप्त विशिष्ट आरोप या उनकी व्यक्तिगत भूमिका स्पष्ट नहीं की गई है।
हाई कोर्ट का अहम संदेश
खंडपीठ ने माना कि वैवाहिक विवाद में बिना ठोस और विशिष्ट भूमिका बताए परिवार के प्रत्येक सदस्य को आपराधिक मुकदमे में शामिल करना उचित नहीं है। इसी आधार पर कोर्ट ने संबंधित FIR और उसके आधार पर आगे की कार्यवाही को निरस्त कर दिया।
हाई कोर्ट के इस फैसले को वैवाहिक विवादों में कानून के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।