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c*लखनऊ तहसील में भ्रष्टाचार का बड़ा विस्फोट: लेखपाल गिरीश सिंह बिष्ट पर सीधे बिल्डरों से लाखों की धन उगाही का आरोप, जांच की उठी मांग*
लखनऊ। सदर तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम मल्हौर और सरायशेख में राजस्व तंत्र द्वारा जबरन वसूली का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। हल्का लेखपाल गिरीश सिंह बिष्ट पर सीधा आरोप लगा है कि वे क्षेत्र के बिल्डरों से स्वयं भारी धन उगाही कर रहे हैं और इसी साज़िश के तहत गरीब ग्रामीणों व किसानों को भी निशाना बनाया जा रहा है। आरोप है कि सरकारी जमीनों और पुराने अधिवासों पर ‘अवैध कब्जे’ का झूठा हव्वा खड़ा कर निर्दोष लोगों को नोटिस भेजे जा रहे हैं, ताकि उनसे भी लाखों रुपये एंठे जा सकें।
*बिल्डरों से सीधी धन उगाही और अवैध कब्जों का खेल*
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मल्हौर और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय बिल्डरों को निशाना बनाकर लेखपाल गिरीश सिंह बिष्ट बिना किसी बिचौलिए के सीधे तौर पर उनसे मोटी रकम डकार रहे हैं। मामले में यह भी सामने आया है कि लेखपाल ने अरुण रावत से भी सीधे तौर पर पैसे लिया गया।
इतना ही नहीं, नंदपुर सरायशेख में विशम्भर रावत से पैसे और प्लॉट की अनुचित मांग किए जाने का मामला भी सामने आया है। इसके अतिरिक्त, नौमी लाल (पुत्र स्व. जुराखन) की मल्हौर स्थित 6 बिस्वा जमीन को पक्के पूर्वी रास्ते में दिखाकर अनुचित दबाव बनाने का प्रयास किया गया। इस समूचे वसूली खेल में आदित्य सिंह से भी पैसे लिए जाने का गंभीर दावा किया गया है।*गैरकानूनी आधार पर जारी नोटिसों का विरोध*
राजस्व तंत्र द्वारा जारी एकतरफा आख्याओं और नोटिसों को पूरी तरह से तथ्यहीन, भ्रामक और कानून विरुद्ध बताया जा रहा है। मामले में मुख्य बिंदु उठाए गए हैं:*प्राकृतिक न्याय का हनन:*
लेखपाल गिरीश सिंह बिष्ट द्वारा बंद कमरे में एकतरफा (Ex-parte) आख्याएं तैयार की गईं, जिनमें प्रभावित पक्षों को अपना पक्ष रखने का कोई अवसर नहीं दिया गया।
धारा 24 के तहत पैमाइश का अभाव: U.P. Revenue Code, 2006 की धारा 24 के अंतर्गत बिना किसी निष्पक्ष सीमान्त या पक्की पैमाइश के सीधे बेदखली के नोटिस जारी कर दिए गए।
काल्पनिक क्षतिपूर्ति: नियमावली के नियम 67(4) का उल्लंघन करते हुए बिना किसी ठोस साक्ष्य के लाखों रुपये की काल्पनिक क्षतिपूर्ति थोप दी गई।*उच्चाधिकारियों तक पैसे भेजने का दावा*
काबिले गौर यह है कि लेखपाल गिरीश सिंह बिष्ट द्वारा यह दावा किया जाता है कि पैसा उच्चाधिकारियों तक को पहुंचाया जाता है इसलिए हमारा कोई कुछ नहीं कर सकता ऐसे में आमजन में जहां विभाग और उच्चाधिकारियों की छवि धूमिल हो रही है वहीं सरकार की नीतियों पर भी सवालिया निशान खड़ा हो रहा है,*विभागीय जांच और चल-अचल संपत्ति के ब्योरे की मांग*
पीड़ितों और स्थानीय ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि:
लेखपाल गिरीश सिंह बिष्ट द्वारा बिल्डरों से की जा रही सीधी धन उगाही की विजिलेंस जांच कराई जाए और उनकी चल-अचल संपत्ति की गहनता से पड़ताल हो।
धन उगाही करने वाले आरोपी लेखपाल पर तत्काल सख्त विभागीय व दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
फर्जी तरीके से जारी किए गए सभी बेदखली नोटिसों को तत्काल प्रभाव से निरस्त (Quash) किया जाए और पीड़ितों को न्याय दिलाया जाए।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन सीधे वसूली करने वाले आरोपी लेखपाल पर क्या कार्रवाई करता है या फिर पीड़ितों को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ेगा।