बरेली में युवक की संदिग्ध मौत से सनसनी, परिजनों ने दोस्तों पर साजिश का लगाया आरोप
बहेड़ी, बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के बहेड़ी थाना क्षेत्र में एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया। मृतक की पहचान शोएब रजा के रूप में हुई है। परिजनों ने उसके कुछ दोस्तों और करीबियों पर हत्या की साजिश रचने तथा घटना से जुड़े कथित सबूत मिटाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
परिजनों के मुताबिक 6 अगस्त की सुबह करीब 5 बजे शोएब की मां ने उसके मोबाइल पर फोन किया था। आरोप है कि फोन किसी अन्य व्यक्ति ने उठाया और शुरुआत में शोएब बनकर बात करने की कोशिश की। बाद में उसने अपना परिचय चांद ख्वाजा के रूप में दिया और बताया कि शोएब सो रहा है। परिजनों के अनुसार, उन्हें सुबह करीब 9 बजे तक घर लौटने की बात भी कही गई थी।
दोपहर करीब 1 बजे चांद ख्वाजा, शोएब की मां को अपने साथ शेरगढ़ चौराहे तक ले गया। परिजनों का आरोप है कि वहां एक कार में शोएब का शव मिला। परिवार ने जब मौत की वजह जानने की कोशिश की तो उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
मोबाइल चैट डिलीट करने का आरोप
मामले में एक और गंभीर आरोप मृतक के मोबाइल फोन को लेकर लगाया गया है। परिवार के अनुसार, शोएब की बहन ने उसका मोबाइल चेक किया था, जिसमें कुछ चैट और मैसेज मौजूद थे। आरोप है कि मौके पर मौजूद अरशद ने इन चैट और मैसेज को डिलीट कर दिया। परिजनों का यह भी आरोप है कि इसके बाद अरशद मुंबई चला गया।
परिवार ने इस मामले में चांद ख्वाजा, बॉमिक मियां, अहमद, नदीम ददा, अरशद और नदीम खां उर्फ टार्जन समेत कई लोगों पर संदेह जताते हुए जांच की मांग की है।
परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग की
मृतक के परिजनों ने पुलिस प्रशासन से मामले की गंभीरता को देखते हुए वैज्ञानिक एवं साक्ष्य आधारित जांच कराने की मांग की है। परिवार चाहता है कि शोएब की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाए और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
पुलिस की ओर से मामले की जांच और संबंधित लोगों से पूछताछ किए जाने की बात कही गई है। फिलहाल युवक की मौत के पीछे की वास्तविक वजह क्या थी और परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
नोट: इस खबर में हत्या, साजिश, चैट डिलीट करने और फरार होने जैसे सभी आरोप परिजनों की ओर से लगाए गए हैं। इन्हें जांच पूरी होने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।