वाराणसी। दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद वाराणसी नगर निगम भी जर्जर भवनों को लेकर सक्रिय हो गया है। शहर में संचालित हॉस्टलों की सूची तैयार कर उनकी स्थिति की जांच शुरू कर दी गई है। खासतौर पर जर्जर हालत में चल रहे हॉस्टलों को चिन्हित कर नोटिस देने की तैयारी है।
वाराणसी में नगर निगम की ओर से पहले ही 489 मकानों को अतिजर्जर श्रेणी में चिन्हित किया जा चुका है। इन मकानों पर निगम की ओर से नोटिस भी चस्पा किए गए हैं। इसके बावजूद अभी तक सभी भवनों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हो सकी है। ऐसे में इन मकानों में रह रहे लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दो साल पहले भवन गिरने के बाद हुआ था सर्वे
शहर में करीब दो वर्ष पहले एक जर्जर मकान गिरने की घटना के बाद नगर निगम ने ऐसे भवनों को चिन्हित करने का अभियान चलाया था। सर्वे के दौरान 489 मकान बेहद खराब स्थिति में मिले थे। इनमें कई भवन ऐसे बताए गए हैं, जिनकी हालत काफी कमजोर है। इसके बावजूद कई जगह मकान मालिक और किरायेदार अब भी रह रहे हैं।
दिल्ली की घटना के बाद हॉस्टलों पर नजर
नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव के अनुसार, दिल्ली की घटना के बाद शहर में संचालित हॉस्टलों को चिन्हित किया जा रहा है। हॉस्टलों की सूची तैयार की जा रही है और जर्जर भवनों में संचालित हॉस्टलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जांच के बाद संबंधित भवनों को नोटिस जारी कर आगे कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
कोर्ट में मामला होने से कार्रवाई में अड़चन
नगर निगम प्रशासन का कहना है कि चिन्हित किए गए अधिकांश जर्जर मकानों से जुड़े मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं। इसी वजह से कई भवनों पर तत्काल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हो पा रही है। हालांकि सवाल यह है कि जिन भवनों को पहले ही खतरनाक घोषित किया जा चुका है, उनमें रह रहे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन की ओर से क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
दिल्ली की घटना के बाद एक बार फिर यह सवाल सामने है कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही जर्जर भवनों पर कार्रवाई तेज होगी या वाराणसी में पहले से चिन्हित 489 अतिजर्जर मकानों को लेकर स्थायी समाधान निकाला जाएगा।