श्यामाखुंटा, मयूरभंज, 15/09/2026:मुंडा समाज की प्राचीन धार्मिक परंपराओं, रीति-रिवाजों एवं सांस्कृतिक आस्थाओं को सुरक्षित रखने तथा इन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय पाहान प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हो गया। मुंडारी भाषा समन्वय समिति एवं सारना सोतोह पाहान गुटुगाम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह प्रशिक्षण शिविर रंगामाटिया स्थित कल्याण मंडप में संपन्न हुआ।समापन दिवस पर मुंडा समाज की पारंपरिक धार्मिक व्यवस्था में बाहरी धार्मिक प्रभावों के कारण हो रहे बदलाव तथा पारंपरिक रीति-रिवाजों के क्षरण को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। विभिन्न मुंडा सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, पाहानों एवं आम लोगों की उपस्थिति में मुंडा समाज की अपनी धार्मिक परंपराओं को सुरक्षित एवं स्वतंत्र रूप से संरक्षित रखने को लेकर विचार-विमर्श किया गया।वक्ताओं ने कहा कि पाहान केवल धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराने वाला व्यक्ति नहीं है, बल्कि वह मुंडा समाज की पारंपरिक धर्म व्यवस्था, आस्था, रीति-रिवाज एवं आध्यात्मिक ज्ञान का संरक्षक है। इसलिए पाहान व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करना पूरे समाज की जिम्मेदारी है।तीन दिवसीय प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले 32 पाहानों को संगठन की ओर से प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। प्रमाणपत्र ग्रहण करने से पहले प्रशिक्षित पाहानों ने सारना सोतोह पाहान गुटुगाम द्वारा निर्धारित नियमों एवं शर्तों का पालन करने की शपथ ली। साथ ही प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त धार्मिक ज्ञान का उपयोग केवल समाज के कल्याण, एकता एवं विकास के लिए करने का संकल्प लिया।समापन समारोह की अध्यक्षता मुंडारी भाषा समन्वय समिति के संयोजक बिरबल सिंह ने की, जबकि महासचिव सुनाराम सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस अवसर पर मुंडारी समाज सावार जामड़ा के अध्यक्ष नंदलाल सिंह, जिला परिषद सदस्य (जोन-49) मधुसूदन सिंह, रंगामाटिया सरपंच रोहिदास सिंह, भारत मुंडा समाज के मनोज मुंडा, दिलीप कुमार सिंह, मुंडारी यूट्यूबर्स एंड आर्टिस्ट्स एसोसिएशन के बाजी सिंह, सेंगे सुसुन काजिगे दुरांग के सुबन सिंह, समन्वय समिति के सलाहकार बिलकान प्रभुदयाल नाग, बेतनटी ब्लॉक संयोजक तपन सिंह सहित रामेश्वर चालाकी, अजीत सिंह, शशिधर सिंह, बुधिया सिंह एवं मनोरंजन सिंह उपस्थित थे।प्रशिक्षण कार्यक्रम में रघुनाथ सिंह, बसंत कुमार सिंह, पूर्णचंद्र सिंह एवं परमेश्वर सिंह ने प्रशिक्षक के रूप में भाग लिया और पाहानों को पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाज, पूजा-विधि तथा पाहान के दायित्वों के संबंध में प्रशिक्षण दिया।कार्यक्रम की सभी व्यवस्थाओं एवं संचालन की जिम्मेदारी राम मुंडा एवं सुनाराम सोसो ने संभाली।आयोजकों के अनुसार, तीन दिवसीय यह प्रशिक्षण शिविर केवल पाहानों के प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मुंडा समाज की धार्मिक पहचान, पारंपरिक आस्था एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक नई पहल की शुरुआत है। आने वाले दिनों में पारंपरिक धर्म एवं रीति-रिवाजों के संरक्षण के लिए ऐसे प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों को और व्यापक किया जाएगा।मुंडारी भाषा समन्वय समिति के संयोजक बिरबल सिंह ने इस दिशा में आगे भी लगातार प्रयास जारी रखने की बात कही।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज।