*एमजीसीयू कुलपति की नियुक्ति पर उठे सवाल, पटना हाईकोर्ट ने मांगा जवाब.*
*कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव को नोटिस, नियुक्ति के लिए निर्धारित योग्यता को लेकर दायर है याचिका*
मोतिहारी। महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय (MGCU), मोतिहारी के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव की नियुक्ति में निर्धारित योग्यता पूरी होने को लेकर पटना हाईकोर्ट में मामला पहुंच गया है। मामले में न्यायालय ने कुलपति समेत संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
CWJC No. 7146 of 2026, डॉ. संदीप पहल बनाम Union of India मामले में पटना हाईकोर्ट ने 17 सितंबर 2026 को सुनवाई की। न्यायमूर्ति अजीत कुमार की अदालत में केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने रिट याचिका में लगाए गए आरोपों पर विस्तृत पैरा-वाइज जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।
न्यायालय ने प्रतिवादी संख्या-5 प्रो. संजय श्रीवास्तव को साधारण डाक तथा एडी (Acknowledgement Due) के साथ रजिस्टर्ड पोस्ट, दोनों माध्यमों से नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने संबंधित आवश्यक दस्तावेज दो सप्ताह के भीतर दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
*10 वर्ष के प्रोफेसर अनुभव की शर्त पर सवाल.*
याचिकाकर्ता डॉ. संदीप पहल की ओर से दायर याचिका में UGC Regulations, 2018 के Clause 7.3(i) का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि कुलपति पद के लिए निर्धारित विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में न्यूनतम 10 वर्ष के अनुभव की शर्त पूरी नहीं होती है।
याचिका के अनुसार, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति पद के लिए भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा 21 मई 2022 को आवेदन आमंत्रित किए गए थे, जिसकी अंतिम तिथि 20 जून 2022 निर्धारित थी।
याचिका में कहा गया है कि डॉ. संजय श्रीवास्तव को BHU की कार्यपरिषद द्वारा 4 अक्टूबर 2012 को CAS के तहत प्रोफेसर पद पर पदोन्नति की स्वीकृति दी गई थी तथा BHU ने 5 अक्टूबर 2012 को पदोन्नति संबंधी अधिसूचना जारी की थी।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि प्रोफेसर पद का अनुभव वास्तविक पदोन्नति अथवा पदभार ग्रहण करने की तिथि से गिना जाए, तो जून 2022 में आवेदन की अंतिम तिथि तक निर्धारित 10 वर्ष का अनुभव पूरा नहीं होता था।
*पटना हाईकोर्ट के पुराने फैसले का भी हवाला.*
याचिका में पटना हाईकोर्ट के CWJC No. 16680 of 2014, Ram Tawakya Singh बनाम State of Bihar मामले में 18 दिसंबर 2015 को दिए गए फैसले का भी हवाला दिया गया है।
याचिका के अनुसार, उक्त मामले में न्यायालय ने कुलपति पद के लिए निर्धारित 10 वर्ष के प्रोफेसर अनुभव की शर्त पर विचार करते हुए कहा था कि आवश्यक अनुभव वास्तविक कार्य-अनुभव होना चाहिए। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि केवल पूर्वप्रभावी अथवा नोशनल पदोन्नति के आधार पर अनुभव की गणना नहीं की जा सकती।
याचिका में आगे कहा गया है कि कुलपति पद के लिए उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग के दौरान यह देखना आवश्यक है कि अभ्यर्थी के पास प्रोफेसर के पद पर वास्तविक रूप से 10 वर्ष का कार्य-अनुभव है या नहीं।
इसी संदर्भ में याचिकाकर्ता ने Supreme Court के Union of India v. M. Bhaskar फैसले का भी उल्लेख किया है और दावा किया है कि केवल नोशनल प्रमोशन की पिछली तारीख के आधार पर अनुभव की गणना नहीं की जा सकती।
*15 अक्टूबर को अगली सुनवाई.*
पटना हाईकोर्ट ने मामले में संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर 2026 को होगी। नियुक्ति से संबंधित याचिका में लगाए गए आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सुनवाई और न्यायालय के आगामी आदेशों के बाद ही स्पष्ट होगा।
रिपोर्ट; अमरजीत सिंह