वाराणसी। रामनगर के टेंगरा मोड़ स्थित लंका मैदान में रविवार तड़के हुई मुठभेड़ के बाद 30 लाख रुपये के इनामी टीपीसी कमांडर बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह का आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उसके खिलाफ झारखंड के अलग-अलग थानों में 44 आपराधिक मामले दर्ज थे। इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी, लूट, पुलिस पर हमला और हथियार अधिनियम से जुड़े मामले शामिल हैं।
बृजेश गंझू पर झारखंड सरकार ने 25 लाख और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पांच लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। इस तरह उसकी गिरफ्तारी पर कुल 30 लाख रुपये का इनाम था। ताजा कार्रवाई में यूपी एटीएस के साथ मुठभेड़ के दौरान उसे गोली लगी और अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
कई जिलों में दर्ज थे मुकदमे
रिकॉर्ड में बृजेश गंझू के खिलाफ वर्ष 1996 से लेकर 2018 तक अलग-अलग थानों में मुकदमे दर्ज होने का उल्लेख है। सिमरिया, टंडवा, लावालौंग, गिद्धौर, कटकमसांडी, वशिष्टनगर, हंटरगंज और अन्य थाना क्षेत्रों में दर्ज मामलों में भारतीय दंड संहिता की कई गंभीर धाराओं के साथ आर्म्स एक्ट और सीएलए एक्ट की धाराएं भी शामिल हैं।
पुराने मामलों में पुलिस बल पर हमले, हत्या, अपहरण और आपराधिक षड्यंत्र जैसे आरोपों से जुड़े मुकदमे दर्ज होने की बात रिकॉर्ड में है। बाद के वर्षों में उसके खिलाफ रंगदारी और जबरन वसूली से संबंधित कई मुकदमे भी दर्ज किए गए।
हत्या और पुलिस पर हमले के भी आरोप
उपलब्ध केस रिकॉर्ड में हत्या और हत्या के प्रयास से संबंधित धाराएं कई मामलों में दर्ज हैं। वर्ष 1996 के सिमरिया थाना क्षेत्र के मामलों से लेकर 2014 और उसके बाद के मुकदमों में हत्या, जानलेवा हमला और हथियारों के इस्तेमाल से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।
वर्ष 2017 के पिपखवार थाना मामले में हत्या समेत आर्म्स एक्ट और यूएपीए की धाराओं का उल्लेख है। इसी तरह सिमरिया और अन्य थाना क्षेत्रों में दर्ज मामलों में पुलिसकर्मियों पर हमला तथा हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े आरोप भी दर्ज हैं।
रंगदारी और वसूली के कई मामले
बृजेश गंझू के खिलाफ दर्ज मामलों में रंगदारी और जबरन वसूली से संबंधित धाराएं भी प्रमुखता से सामने आती हैं। टंडवा, लावालौंग और सिमरिया थाना क्षेत्रों में दर्ज कई मुकदमों में धारा 384, 385, 386 और 387 के तहत मामले दर्ज किए गए थे।
इनमें कुछ मामलों में आपराधिक षड्यंत्र और प्रतिबंधित संगठन से जुड़े होने की धाराएं भी जोड़ी गई थीं। एनआईए की जांच से जुड़े मामलों में भी उसका नाम सामने आने की जानकारी विभिन्न रिपोर्टों में दी गई है।
2018 तक लगातार दर्ज होते रहे मुकदमे
केस रिकॉर्ड से पता चलता है कि उसके खिलाफ 2018 तक भी नए मुकदमे दर्ज होते रहे। इनमें रंगदारी, हथियार रखने, पुलिस पर हमला, हत्या के प्रयास और प्रतिबंधित गतिविधियों से संबंधित धाराएं शामिल थीं।
कई मामलों में एक साथ भारतीय दंड संहिता, आर्म्स एक्ट, सीएलए एक्ट और यूएपीए की धाराएं लगाई गई थीं। हालांकि प्रत्येक मामले में आरोपों की स्थिति अलग-अलग रही होगी और केस रिकॉर्ड में दर्ज आरोपों को न्यायिक दोषसिद्धि के समान नहीं माना जा सकता।
ऐसे घिरा था वाराणसी में
पुलिस के अनुसार, यूपी एटीएस को सूचना मिली थी कि बृजेश गंझू मोटरसाइकिल से टेंगरा मोड़ के रास्ते रामनगर की ओर जाने वाला है। रविवार तड़के करीब पांच बजे टीम ने इलाके में घेराबंदी की।
पुलिस का कहना है कि टीम ने उसे रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद उसकी ओर से फायरिंग की गई। जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया। उसे अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
मुठभेड़ के दौरान एटीएस के डिप्टी एसपी विपिन राय और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण की बुलेटप्रूफ जैकेट पर भी गोली लगने की जानकारी सामने आई है। दोनों पुलिसकर्मी सुरक्षित बताए गए हैं।
अब वाराणसी कनेक्शन की भी होगी जांच
बृजेश गंझू के वाराणसी में मौजूद होने के बाद सुरक्षा एजेंसियां उसके स्थानीय संपर्कों की भी पड़ताल कर रही हैं। खास तौर पर यह पता लगाने की कोशिश होगी कि वह पूर्वांचल में किसके संपर्क में था, कितने समय से यहां सक्रिय था और उसके आने-जाने में किसने मदद की।
उसके खिलाफ दर्ज पुराने मामलों और वाराणसी में सामने आए संपर्कों को जोड़कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों की जांच के बाद ही उसके पूर्वांचल नेटवर्क से जुड़े अन्य नामों की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।